राजसमंद: मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के राजस्थान गौरव यात्रा की शुरुआत 4 अगस्त से हो रही है. मुख्यमंत्री अपनी इस यात्रा की शुरुआत मेवाड़ के आराध्य देव श्री चारभुजानाथ की पूजा अर्चना के साथ करेंगी. साल 2003 में भी वसुंधरा राजे ने अपने परिवर्तन यात्रा का आगाज यहीं से किया था. जिसके बाद विधानसभा चुनाव में बहुमत हासिल कर वसुन्धरा राजे राजस्थान के सत्ता पर आसीन हुइ थीं. लेकिन जिन प्रभु के आर्शीवाद से वसुंधरा राजे ने सत्ता की कुर्सी प्राप्त की है जब उनकी सेवा की बारी आती है तो मुख्यमंत्री साहिबा अपने सारे वादे भूल जाती हैं

खबर के मुताबिक श्री चारभुजानाथ की स्थिति ठीक नहीं है. साल 2003 में जब वसुंधरा राजे मुख्यमंत्री बनीं थी उन्होने मंदिर की हालत देखते हुए 17 करोड़ का बजट मंदिर विस्तार के लिए पारित किया था. मगर मंदिर के हालात वैसे ही रहे. साल 2015 में भी वसुंधरा राजे ने सुराज संकल्प यात्रा की शुरुआत श्री चारभुजा नाथ से की और मुख्यमंत्री बनीं. जिसके बाद मुख्यमंत्री ने मंदिर के विकास के लिए 30 करोड़ की घोषणा की. जिससे चारभुजा मंदिर परिक्रमा का विस्तार , देवस्थान में 60 कमरों की धर्मशाला का निर्माण, दूध तलाई रिंग रोड़ का निर्माण, साथ ही रोकड़िया हनुमान जी के मंदिरों का भी विकास करना था.

लेकिन साल 2018 के चुनावी समय आते ही मंदिर के विकास के 30 करोड़ के बजट में कटौती कर दी गई. कटौती के बाद मंदिर के विकास का बजट सिर्फ 7 करोड़ रह गया. मुख्यमंत्री के यह कदम से श्री चारभुजानाथ के भक्तों के साथ अब यहां की जनता भी खासी नाराज है. भक्तों की मानें तो वसुंधरा राजे को उनके आराध्य से किए वादा न निभाने की सजा जरुर मिलेगी. अब देखना ये है कि क्या इस बार श्री चारभुजानाथ का आशीर्वाद और यहां की जनता का विश्वास वसुंधरा राजे को मिल पाएगा.

फिलहाल पार्टी 4 अगस्त से शुरू हो रहे राजस्थान गौरव यात्रा की तैयारी में लगी है. यात्रा के मद्देनजर श्री चारभुजा नाथ मंदिर से लेकर जिला मुख्यालय पर होने वाली आमसभा की तैयारियां युद्धस्तर पर चल रही है.एक ओर जहां पार्टी के मुख्यालय को रंग रोगन से चमकाया जा रहा है तो दूसरी ओर पूरे शहर को दुल्हन की तरह सजाया जा रहा है.