नई दिल्लीः घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में गेहूं की कीमतों में अचानक भारी बढ़ोत्तरी हुई है, जिससे आटा और बिस्कुट विनिर्माता लागत में बढ़ोत्तरी का बोझ ग्राहकों पर डालने को मजबूर हो रहे हैं। ब्रिटानिया और पार्ले कीमतें बढ़ाने के बारे में विचार कर रही हैं। ब्रिटानिया ब्रेड और बिस्कुट दोनों में और पार्ले बिस्कुट में गेहूं का इस्तेमाल करती है। आईटीसी भी कीमतें बढ़ाने पर विचार कर रही है, जो बिस्कुट और आशीर्वाद ब्रांड का आटा बनाती है।

गेहूं के दाम एक महीने में 6.3 फीसदी बढ़े हैं क्योंकि गेहूं की फसल का रकबा पहले के अनुमान से 1.5 फीसदी कम रहने के आसार हैं। चालू वर्ष में सरकारी एजेंसियों ने खाद्य सुरक्षा के लिए लक्ष्य से ज्यादा गेहूं खरीदा है। इससे खुले बाजार में बिक्री के लिए उपलब्ध स्टॉक कम हो गया है। ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज के प्रबंध निदेशक वरुण बेरी ने बताया, ‘हमें कीमतों में बढ़ोत्तरी करनी होगी। हमने गेहूं की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित की है, लेकिन इसकी भी एक सीमा है। गेहूं की कीमतें बढऩे जा रही हैं, इसलिए हमें कीमतें बढ़ाने की योजना बनानी होगी। यह बढ़ोत्तरी औसतन 3 से 4 फीसदी रहने और चौथी तिमाही की शुरुआत से किए जाने के आसार हैं।’

बिस्कुट और कन्फेक्शनरी बनाने वाली दिग्गज कंपनी पार्ले ने कहा कि वह कीमतों में बढ़ोत्तरी पर विचार कर सकती है। पार्ले प्रोडक्ट्स में उत्पाद श्रेणी के प्रमुख मयंक शाह ने कहा, ‘इनपुट लागत में करीब 15 से 20 फीसदी बढ़ोत्तरी हो चुकी है। शुद्ध असर उत्पादन की सामग्री लागत पर निर्भर करता है, जो 8 से 12 फीसदी बढ़ा है। कुछ किस्मों में इसकी भरपाई के लिए कुछ उत्पादों की कीमतों में करीब 10 फीसदी बढ़ोत्तरी और कीमत संवेदनशील उत्पादों में 7 से 8 फीसदी बढ़ोत्तरी की जरूरत है।’ पिछले साल सरकारी एजेंसियों ने 295 लाख टन गेहूं की खरीद की थी। वहीं इस साल खरीद का लक्ष्य 320 लाख टन था, लेकिन वास्तविक खरीद 350 लाख टन रही है। गेहूं उत्पादन के अनुमान को पिछले साल से 1.4 फीसदी घटाकर वर्ष 2017-18 में 971.1 लाख टन किया गया है।