मुम्बई : पूर्व केंद्रीय मंत्रियों यशवंत सिन्हा और अरुण शौरी तथा भाजपा के असंतुष्ट नेता शत्रुघ्न सिन्हा ने फिर से केंद्र सरकार पर राफेल लड़ाकू विमान से लेकर ‘प्रधानमंत्री कार्यालय में सत्ता के केन्द्रीकरण’ तक को लेकर निशाना साधा. यहां ‘लोकतंत्र बचाओ, संविधान बचाओ’ विषय एक परिचर्चा के दौरान यशवंत सिन्हा ने दावा किया कि राजग सरकार में निर्णय ‘अकेले ही लिये जा रहे हैं.’ उन्होंने राजनाथ सिंह का नाम लिये बिना दावा किया कि गृह मंत्री को जम्मू कश्मीर में पीडीपी के साथ गठबंधन से हटने के भाजपा के निर्णय के बारे में जानकारी भी नहीं थी.

उन्होंने कहा कि इसी तरह से वित्त मंत्री को जानकारी नहीं थी कि नोटबंदी की घोषणा होने जा रही है. उन्होंने राफेल लड़ाकू विमान सौदे को ‘35 हजार करोड़ रुपए का घोटाला बताया जो कि 64 करोड़ रुपए के बोफोर्स घोटाले से कहीं बड़ा है.’ शौरी ने आरोप लगाया, ‘निश्चित रूप से संविधान और लोकतंत्र खतरे में है. अभी तक पीट पीटकर मार डालने की 72 घटनाएं हुई हैं, सोहराबुद्दीन (फर्जी मुठभेड़) मामले में 54 गवाह पलट चुके हैं...सीबीआई का दुरूपयोग किया जा रहा है...ऐसी उम्मीद नहीं लगती कि चीजें बदलेंगी.’

उन्होंने कहा कि मीडिया भयभीत है, क्योंकि उसका विज्ञापन बंद हो सकता है. सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि वह अपने से भाजपा नहीं छोड़ेंगे. उन्होंने कहा, ‘हालांकि यदि वे मुझे बाहर करना चाहें तो मैं उनके विवेक पर सवाल नहीं उठाऊंगा.’

इससे पहले दिल्ली में यशवंत सिन्हा और शौरी ने अधिवक्ता-कार्यकर्ता प्रशांत भूषण के साथ एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए फ्रांस से 36 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने से जुड़े 58,000 करोड़ रुपये के सौदे के संबंध में कई सवाल उठाए. राजग सरकार के कटु आलोचक के रूप में जाने जाने वाले इन तीनों लोगों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर अकेले ही सौदे से जुड़े मानकों को बदलने का आरोप लगाया और कहा कि सौदे को अंतिम रूप में देने में आवश्यक प्रक्रियाओं का गंभीर उल्लंघन किया गया. उन्होंने आरोप लगाया कि समूचा सौदा ‘आपराधिक कदाचार, सार्वजनिक पद के दुरुपयोग और राष्ट्रीय हित तथा राष्ट्रीय सुरक्षा की कीमत पर पक्षों को संपन्न बनाने का अनूठा मामला है.’ तीनों लोगों ने कहा कि सरकार ने तथ्यों को ‘‘छिपाने’’ का प्रयास किया.