पत्रकार राममोहन चौकसे का जब जिक्र होता है तो खिचड़ी बाल, स्लिम फिट पर्सनाल्टी और लो प्रोफाइल के बंदे का चेहरा उभरता है। अपनी 36 बरस की सहाफत में राममोहन लाइमलाइट से दूर ही रहते आए हैं। वो अच्छे लिक्खाड़ के साथ ही कई सारे रिफरेंस की खान भी हैं। थोड़ा धार्मिक रूझान के आदमी हैं तो सूबे का कोई धार्मिक स्थल नहीं है जहां ये न पहुंचे हों। लिहाजा सोचा क्यूं न मध्य प्रदेश के धार्मिक स्थल उनवान से एक किताब ही लिखी जाए। ग्लेज्ड पेपर पर 75 पेज की इस किताब में हर धार्मिक स्थल के  खूबसूरत फोटो के साथ उसकी मजहबी अहमियत को बखूबी लिखा गया है। इसे सूबे के जनसंपर्क मेहकमे ने शाया किया। मुल्क की जीवन रेखा मां नर्मदा का जिक्र हो। चित्रकूट पर्वत पर विराजीं शारदा माई का गुणगान हो। सूबे के कश्मीर कहलाने वाले पचमढ़ी की बात हो। मुहब्बत के  किस्सों क ो बयां करते खजुराहो के मंदिरों की दीवारों पे उकेरी गर्इं प्रतिमाएं हों। इस किताब में ये सब गागर में सागर की तरह समाए हुए हैं। इस किताब में हम उज्जैन के बाबा महाकाल, ओरछा, दतिया की पीतांबरा, जबलपुर की चौंसठ योगिनी, सलकनपुर की विंध्यवासिनी, इंदौर के खजराने वाले गणेश सहित मैहर और चंदेरी तक के सिद्ध स्थलों के धार्मिक और ऐतिहासिक तथ्यों को पढ़ सकेंगे। आज शाम 6 बजे रवींद्र भवन में मधुवन संस्था अपने गुरुवंदना महोत्सव में इस किताब का विमोचन करवा रही है। मंत्री उमाशंकर गुप्ता, कई पत्रकारों के उस्ताद महेश श्रीवास्तव इसका विमोचन करेंगे। मुबारक हो मियां।