जयपुर : पेट्रोल-डीजल के दामों में लगी आग के बाद कुछ राज्यों से राहत की खबरें आई हैं. पंजाब, कर्नाटक और हिमाचल प्रदेश की सरकारों ने पेट्रो ईंधन से वैट कम करने की घोषणा की है. इसी क्रम में राजस्थान सरकार ने भी अपने सूबे के लोगों को राहत पहुंचाने की पहल की है. हालांकि इससे राज्य के खजाने को 2000 करोड़ रुपये का नुकसान होगा.

राजस्थान सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर मूल्य वर्धित कर वैट को 4-4 प्रतिशत कम करने की घोषणा रविवार को की. इससे राज्य में पेट्रोल व डीजल ढाई रुपये प्रति लीटर तक सस्ता होगा. मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने अपनी राजस्थान गौरव यात्रा के तहत हनुमानगढ़ के रावतसर कस्बे में एक सभा में पेट्रोलियम ईंधन सस्ता करने वाले इस निर्णय की घोषणा की. इसके तहत राज्य में वैट पेट्रोल पर 30 से घटाकर 26 प्रतिशत और डीजल पर 22 से घटाकर 18 प्रतिशत किया गया है.

मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने कहा कि राज्य की आम जनता, किसानों व गृहिणियों को राहत देने के लिए राज्य सरकार ने यह कदम उठाया है. उन्होंने कहा कि इससे सरकार को 2000 करोड़ रुपये के राजस्व की हानि होगी.

मुख्यमंत्री ने यह घोषणा ऐसे समय में की है जबकि मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने पेट्रोल व डीजल के बढ़ते दाम के खिलाफ सोमवार को भारत बंद की घोषणा कर रखी है.

पेट्रोल और डीजल की कीमतें रविवार को एक नये रिकॉर्ड पर पहुंच गईं. वैश्विक बाजार में कच्चे तेल के बढ़ते दाम और रुपये में गिरावट से ईंधन की कीमतों में तेजी बनी हुई है.

सरकारी ईंधन विपणन कंपनियों द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार रविवार को दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 12 पैसे और डीजल की 10 पैसे प्रति लीटर बढ़ गई. दिल्ली में रविवार को पेट्रोल की कीमत 80.50 रुपये और डीजल की कीमत 72.61 रुपये प्रति लीटर हो गई. यह ईंधन की कीमत का नया उच्च स्तर है. सभी मेट्रो शहरों और अधिकतर राज्यों की राजधानी के मुकाबले दिल्ली में ईंधन की कीमत सबसे कम है.

ईंधन के दामों में उछाल की अहम वजह विभिन्न कारणों से कच्चे तेल के बाजार में लगातार तेजी और अमेरिकी डॉलर की रिकार्ड मजबूती है. इससे कुल मिला कर कच्चे तेल का आयात महंगा हुआ है. भारत को अपनी जरूरत का 80 प्रतिशत से अधिक तेल आयात करना होता है.

पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों के खिलाफ कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दलों ने 10 सितंबर को भारत बंद का ऐलान किया है. कांग्रेस नेता अजय माकन ने कहा कि पार्टी चाहती है कि डीजल और पेट्रोल को वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के अंतर्गत लाया जाए जिससे इनकी कीमतों में 15 से 18 रुपये की कमी आएगी. उन्होंने कहा कि केंद्रीय उत्पाद शुल्क और राज्यों में अत्यधिक वीएटी (वैट) दरों में तत्काल कमी लाई जानी चाहिए.