नई दिल्‍ली: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को आदेश दिया कि अगर किसी वाहन का बीमा खत्‍म हो चुका है और उससे दुर्घटना हो जाती है तो प्रभावित व्‍यक्ति को उस गाड़ी को बेचकर हर्जाना चुकाया जाना चाहिए. शीर्ष अदालत ने सभी राज्‍यों से मोटर वाहन अधिनियम में संशोधन करने का आदेश दिया है ताकि इस व्‍यवस्‍था को अनिवार्य बनाया जा सके. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने ऑटो कंपनियां को आदेश दिया था कि वे अनिवार्य थर्ड पार्टी बीमा के बिना चारपहिया और दुपहिया गाड़ियां नहीं बेच सकतीं.

यह व्‍यवस्‍था 1 सितंबर 2018 से लागू हुई है. नए चार पहिया वाहनों का रजिस्ट्रेशन कराते समय 2 साल का थर्ड पार्टी बीमा अनिवार्य रूप से लेना होगा. इसी तरह दोपहिया वाहनों के लिए 5 साल तक का थर्ड पार्टी बीमा अनिवार्य कर दिया गया है. सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला सड़क दुर्घटनाओं में बढ़ोतरी के मद्देनजर लिया है. क्योंकि ऐसा माना जा रहा था कि लोग जब नई गाड़ी खरीदते हैं तो बीमा कराते हैं, लेकिन इनमें से कई लोग बीमा पॉलिसी का रिन्यूवल नहीं कराते.

सुप्रीम कोर्ट ने सड़क सुरक्षा पर अदालती कमेटी की सिफारिशों का उल्‍लेख करते हुए यह नियम अनिवार्य किया है. कमेटी ने सिफारिश की थी कि दोपहिया या चौपहिया वाहनों की बिक्री के समय थर्ड पार्टी इंश्‍योरेंस कवर एक साल की जगह क्रमश: 5 साल और 2 साल के लिए अनिवार्य किया जाए. सिर्फ 45 फीसदी बाइक व स्‍कूटर ही बीमित हैं जबकि 70 फीसदी कार इंश्‍योर्ड हैं.

अदालत में सुनवाई के दौरान जब बीमा कंपनियों ने इस प्रस्ताव पर ऐतराज जताया तो सुप्रीम कोर्ट ने बीमा कंपनी को फटकार लगते हुए कहा कि सड़क दुर्घटना में लोग मर रहे हैं. सड़क दुघर्टना में एक लाख से ज्यादा मौत हर साल हो जाती है. हर तीन मिनट में एक दुर्घटना होती है. लोग मर रहे हैं और आप कह रहे हैं कि उन्हें मरने दिया जाए. अदालत ने टिप्पणी की, 'आप उनको देखिए, वह सड़क दुर्घटना में मर रहे है. भारत की जनता मर रही है. उनके लिए और बेहतर करिए.