आज से गणेश चतुर्थी का त्यौहार शुरू हो चुका है। गणेश चर्तुर्थी के मौके पर देश के हर हिस्से में रौनक दिखाई देती है। इसके पहले दिन गणपति बप्पा की मूर्ति स्थापित की जाती है और यह उत्सव 10 दिन तक चलता है। इस दौरान भगवान गणेश को अलग-अलग भोग और मोदक का प्रसाद चढ़ाया जाता है लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर क्यों गणपति बप्पा को मोदक का भोग लगाया जाता है।

क्यों चढ़ाया जाता है मोदक?
गणपति बप्पा को मोदक और लड्डू बहुत प्रिय है लेकिन इसके पीछे एक कहानी है। भगवान विष्णु के छठे अवतार परशुराम जी से युद्ध के दौरान भगवान गणेश जी का एक दांत टूट गया था। इसके कारण उन्हें भोजन करते समय काफी दिक्कत होती थी। इसी कारण उनके लिए स्वादिष्ट लड्डूू और मोदक बनाए गए, जो उनके मुंह में जाते ही घुल जाते थे। इसके बाद मोदक विघ्नहार्ता गणपति के बेहद प्रिय हो गए। यही वजह है कि उन्हें मोदक और लड्डू का भोग जरूर लगाया जाता है।

मोदक का अर्थ होता है खुशी इसलिए इसे खाते ही व्यक्ति प्रसन्न हो जाता है। दरअसल, मराठी में खुशी को मोदक कहा जाता है। मोदक बनाने के कई तरीके हैं। सबसे लोकप्रिय और प्रसिद्ध तरीका यह है कि चावल का आटा और गेंहू का आटा मिलाकर, उसमें नारियल, गुड़ और मेवे से भरकर भाप से पकाया जाता है।