नई दिल्लीः सरकार कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने के लिए जैव-ईंधन उत्पादन बढ़ाने पर ध्यान दे रही है। इसके मद्देनजर जैव ईंधन उत्पादन के लिए जनजातीय समूहों को अखाद्य तेल बीज एकत्रित करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने यह बात कही।

गडकरी ने कहा कि देश कच्चे तेल के आयात पर 8 लाख करोड़ रुपए खर्च कर रहा है। इसलिए आदिवासी समुदायों से जैव-ईंधन उत्पादन के लिए अखाद्य बीज जैसे ‘रतनजोत, साल और मोहन’ बीजों को एकत्रित करने का आग्रह किया गया है। उन्होंने कहा कि यदि जैव-ईंधन भारत के भारी-भरकम विमान ईंधन आयात को भी कम कर सका तो हम नवोन्मेष और तकनीक के माध्यम से 30,000 करोड़ रुपए बचा सकते हैं। यह देश की आर्थिक सेहत के लिए बड़ा योगदान होगा।

गडकरी ने राजमार्गों के मामले में कहा कि भूमि अधिग्रहण के लिहाज से नई दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस हाई-वे में 16,000 करोड़ रुपए की बचत होगी। भूमि अधिग्रहण की दर 80 लाख रुपए प्रति हेक्टेयर होने की वजह से यह बचत होगी। पहले यह दर 7 करोड़ रुपए प्रति हेक्टेयर थी। उन्होंने कहा कि इस परियोजना को पूरा होने में ढाई साल लग सकते हैं और इससे दिल्ली से मुबंई की दूरी 120 किलोमीटर कम होगी।

केंद्रीय मंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से एक कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुये कहा कि पहले के समय में ग्रामीण और कृषि क्षेत्र को नजरअंदाज किया गया। इसका नतीजा यह हुआ कि आजादी के समय ग्रामीण क्षेत्रों में जो 85 प्रतिशत आबादी रहती थी वह घटकर 54.25 प्रतिशत रह गई। उन्होंने कहा कि यह पलायन को दर्शाता है। हमें पता लगाना है कि इसके क्या कारण हैं कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था बहुत ही महत्वपूर्ण है और यही वजह है कि हमारी सरकार ग्रामीण क्षेत्र के विकास को सबसे ज्यादा महत्व दे रही है। इसी को देखते हुए प्रधानमंत्री आवास योजना और प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना जैसे कार्यक्रम लाए गए हैं।