भोपाल: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की सरकार की ओर से राज्यमंत्री का दर्जा पाने वाले स्वामी नामदेव त्यागी उर्फ कंप्यूटर बाबा ने सोमवार को यह दर्जा छोड़ दिया. भोपाल में शाम 5 बजे प्रेस कॉन्फ्रेस करते हुए कंप्यूटर बाबा ने अपने इस्तीफे की घोषणा की. इस दौरान बाबा ने शिवराज सरकार पर उपेक्षा करने का भी आरोप लगाया. बाबा ने कहा शिवराज सरकार मेरी नहीं सुन रही है, सरकार धर्म के प्रति नहीं चलना चाहती है. कंप्यूटर बाबा को करीब छह महीने पहले प्रदेश सरकार ने राज्यमंत्री का दर्जा दिया था. उन्होंने बताया, "मैंने राज्यमंत्री के दर्जे से त्यागपत्र दे दिया है, क्योंकि हजारों संतों ने मुझ पर त्यागपत्र देने का दबाव बनाया है

बाबा ने कहा, "हमारा एक सिस्टम है जिसमें सभी संत एकसाथ बैठते हैं और निर्णय लेते हैं. उनका कहना है कि शिवराज सरकार धर्म के अनुसार कार्य नहीं कर रही है. मुझे लगता है कि वे सही कह रहे हैं. मुझे ऐसा लगा शिवराज धर्म के ठीक विपरीत हैं और धर्म का काम कुछ करना ही नहीं चाहते. इसलिए मैंने इस्तीफा दिया."

बाबा ने कहा, "मुख्यमंत्री ने मुझसे वादा किया था कि मध्यप्रदेश में अवैध रेत उत्खनन नहीं होगा, गाय की दुर्दशा नहीं होगी, मठ-मंदिरों के संत जो कहेंगे, वह करेंगे." उन्होंने ताना मारते हुए कहा, "लेकिन उन्होंने (चौहान) सब ढकोसलापन किया है. मुझसे जो वादे किये थे, ठीक इसके विरुद्ध काम किया मुख्यमंत्री ने."  

उन्होंने कहा, "संतों ने शिवराज से काम कराने का जिम्मा मुझे सौंपा था. शिवराज से काम नहीं करा पाने के लिए संतों ने मुझे 100 में से शून्य नंबर दिए हैं. मैं तो फेल ही हो गया न." कंप्यूटर बाबा ने कहा, "शिवराज सरकार से काम न करवाने के कारण हजारों संतों ने मुझ पर त्यागपत्र देने का दबाव बनाया है. मैं संत हूं. संतों के आदेश का पालन करता हूं. इसलिए इस्तीफा दिया है

उन्होंने कहा, "मैं संत-पुजारियों के हित में मठ मंदिर संरक्षण, गौ सरंक्षण, नर्मदा संरक्षण के साथ-साथ अनेक धार्मिक कार्यों के लिए अथक प्रयास करने के बावजूद अपनी बात सरकार से मनवाने में नाकाम रहा, इसलिए त्यागपत्र दिया है."

गौरतलब है कि मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार ने इस साल अप्रैल में पांच हिन्दू बाबाओं को राज्यमंत्री का दर्जा दिया था. इनमें नर्मदानंद महाराज, हरिहरनंद महाराज, कंप्यूटर बाबा, भय्यूजी महाराज एवं पंडित योगेन्द्र महंत शामिल हैं. इनमें से भय्यूजी महाराज का हाल ही में निधन हो चुका है. बाबाओं को राज्यमंत्री का दर्जा देने पर सरकार की तीखी आलोचना होने पर मामले को दबाने के लिए मुख्यमंत्री चौहान ने अपने बचाव में कहा था कि प्रदेश सरकार विकास एवं लोगों के कल्याण के लिए समाज के सभी तबके के लोगों का समर्थन जुटा रही है.