ग्वालियर: व्यापम महाघोटाले में विशेष सत्र न्यायालय से सीबीआई को बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने सबूत के अभाव में इस फर्जीवाड़े के 10 आरोपियों को बरी कर दिया है। पड़ाव पुलिस ने छह साल पहले 30 सितंबर 2012 को इन आरोपियों को आरक्षक भर्ती परीक्षा देने से पहले गिरफ्तार किया था। कोर्ट ने पुलिस की कार्यवाही को भी संदेहास्पद माना है।

बचाव पक्ष के अधिवक्ता दिनेश राठौड़ का कहना है कि, छह साल तक बदनामी का दंश झेलने के बाद उनके मुवक्किल अब तत्कालीन थाना प्रभारी पड़ाव अनिल उपाध्याय के खिलाफ 50 लाख रुपए की मानहानि का दावा कोर्ट में पेश करेंगे।

दरअसल पड़ाव थाना क्षेत्र में विधि चंद धर्मशाला में पुलिस ने 30 सितंबर 2012 को छापा मारा था। थाना प्रभारी अनिल उपाध्याय का कहना था कि उन्हें मुखबिर से सूचना मिली थी कि आरक्षक भर्ती परीक्षा में फर्जी तरीके से सॉलवर के तौर पर बैठने के लिए कुछ युवक आए हैं। इस दौरान उन्होंने 10 युवकों को गिरफ्तार किया था और उनके कब्जे से कुछ दस्तावेज भी बरामद किए थे।

पुलिस जांच के तीन साल इस मामले को सीबीआई कोर्ट के सुपुर्द किया और शुरू से जांच की गई। पुलिस को आरोपियों के खिलाफ सबूत नहीं मिले तब उसने क्लोजर रिपोर्ट विशेष कोर्ट में लगाई। लेकिन, इसे स्वीकार नहीं किया गया। इसके बाद कोर्ट ने पहले पुलिस का पक्ष सुना और तत्कालीन टीआई के भी बयान दर्ज किए। उनके बयान के बाद विशेष कोर्ट ने सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को अस्वीकार कर दिया।

कोर्ट ने आदेश दिया कि यदि केस में पर्याप्त साक्ष्य हैं, इसलिए ट्राई चलाई जाए। सीबीआई को आरोपियों के खिलाफ साक्ष्य पेश करने के लिए कई बार टाइम दिया गया। लेकिन, ट्रायल के दौरान एक भी ऐसा सबूत नहीं मिला जिससे आरोपियों पर अपराध सिद्ध होता हो। इसके बाद कोर्ट ने सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को सही ठहराते हुए आरोपियों को बरी कर दिया।