रिश्ता कितना भी मजबूत हो, उनमें छोटी-मोटी अनबन लगी रहती है। अगर आप और आपके पार्टनर मेच्योर हैं, तो इन छोटी-मोटी तकरारों से आपका रिश्ता मजबूत होता है मगर ज्यादातर लोगों में परेशानियां शुरू हो जाती हैं। एक शोध के अनुसार 70 प्रतिशत रिश्ते केवल इसलिए बिगड़ते हैं क्योंकि एक पार्टनर को लगता है कि दूसरे पार्टनर का व्यवहार बदल गया है। अमूमन शादी से पहले या शादी के बाद के सालों में आपस में प्यार ज्यादा गहरा होता है। लेकिन धीरे-धीरे जब लोग एक-दूसरे के अभ्यस्त हो जाते हैं, तो कुछ रिश्तों में दूरी आने लगती है। ऐसे समय में तब मुश्किल बढ़ जाती है जब आपका साथी रिश्ते और आपके प्रति सहानुभूति न रखता हो। आइए जानते हैं कि रिश्ते के प्रति असंवेदनशील साथी के साथ कैसे डील किया जाए।

दरअसल रिश्तों के टूटने की शुरुआत गलतफहमियों से होती है। अक्सर ये छोटी-छोटी गलतफहमी बहुत सी कडवाहट अपने आप में समेट लाती हैं। और जब एक लम्बा अरसा बीत जाता है तो इनके कारण रिश्ते में नफरत और क्रोध आ जाते हैं। कई बार ये गलतफहमियां ही होती हैं जिनकी वज़ह से आपका साथी आपके और अपने रिश्ते दोनो के प्रति सहानुभूति खो देता है, और रिश्ते को एक बोझ की तरह मानता है।

कई मुद्दों पर महिलाएं और पुरूष दोनों अपने को ही श्रेष्ठ समझते हैं। ध्यान रहे ऐसे में अगर आप समझदारी से काम न लें, तो आने वाले समय में इस बात को ले कर आपस में समस्याएं बढ़ सकती हैं। इसका मतलब ये नहीं कि आप सब कुछ सहती जाएं। सही तरीके से और सही समय पर चीजों का जवाब दें। रिश्ते में एक-दूसरे पर विश्वास करना बहुत जरूरी होता है, अपने साथी को भी इसका अहसास कराएं। अपने साथी को भी अपनी बात और काबिलियत रखने का मौका दें।  इसके अलावा रिश्तों के टूटने और साथी के रिश्ते के प्रति अजीब व्यवहार के कुछ अन्य लक्षण और कारण भी होते हैं,

किसी रिश्ते से जुड़े दोनों लोगों की अपने रिश्ते के प्रति अपनी कुछ जिम्मेदारी व अपनी कुछ मांग होती हैं। ऐसा मुम्किन नहीं कि जिस प्रकार आप पहले दोस्त के रूप में जो व्यवहार करते थे, वह रिश्ते में जाने पर भी कर सकेंगे। जैसे अक्सर दोस्त से प्रेमी बने लड़का व लड़की पहले तो अपने साथी से  हल्का-फुल्का मजाक और दोस्ताना व्यवहार कर लेते हैं। लेकिन रिश्ते में जाने के बाद चीजें काफी बदल जाती हैं और आप पहले जैसा व्यवहार नहीं कर सकते हैं। कई बार आपका साथी इस बातको नहीं कहता लेकिन मन ही मन आपसे जी चुराने लग जाता है।

हर रिश्ते की अलग जरूरतें होती है। कहीं आपको बड़प्पन निभाना होता है, तो कहीं छोटा बनकर रहना पड़ता है। इसलिए अपने रिश्ते की जरूरत को समझना व उसके अनुरूप व्यवहार करना आपकी जिम्मेदारी है। ऐसा करने से न सिर्फ आपको बल्कि आपसे जुड़े लोगों को भी आसानी होती है। जब साथी नीरस हो तो रिश्ते को हमेशा सहजता से निभाएं, ताकि आपका व्यवहार बोझ ना लगे। कई बार साथी के बदलते व्यवहार को बर्दाश्त करना मुश्किल हो जाता है, जिसके कारण रिश्ता टूटने की कगार पर पहुंच जाता है। लेकिन यही वह समय होता है जब आपको संयम और बुद्धी से काम लेने की जरूरत होती है।

किसी भी रिश्ते को बचाने के लिए सबसे जरूरी है भावनात्मक रूप से उसे स्वीकार करना। अक्सर लोग रिश्ते की शुरुआत के कुछ सालों में अपने साथी से इस बारे में खुलकर बात करने से कतराते हैं, जो बाद में दरारों का रूप ले लेती है और आपके साथी के व्यवहार को बदल कर रख देती है। इसीलिए आपके लिए यह समझना जरुरी है कि आप खुद को स्वतंत्र रूप से व्यक्त करें। अभी तक आपने जो भी फैंसले लिये हैं, वे आपकी भावनात्मक सोच को दर्शाते हैं। लेकिन जब साथी की तरफ से प्रयास ठीक प्रकार से न हो पा रहा हो तो अपने रिश्ते को मजबूत बनाने के लिए आपको सबसे पहले उन अनसुलझी भावनाओं को पहचान कर उन्हें व्यक्त करना होगा जो आपको अपने अन्दर की बंदिश से उन्मुक्त करेंगी।

बीती जिन्दंगी में संबंधों को समझने में जो गलतियां आपसे या आपके साथी से हुई हैं, ये वक्त उनसे सीख लेकर अपने रिश्ते में विश्वास और मजबूती लाने का है। सकारात्मक सोच और सही टोन के साथ संबंध को सामान्य बनाने की कोशिश करें। यकीन मानिए, आपको वह प्रेम अवश्य मिल जाएगा, जो आप हमेशा से चाहती थीं।