अब मिलेगा तुरंत न्याय, एक जुलाई से देश में लागू होंगे ये 3 नए कानून

Jun 28, 2024 - 15:03
Jul 12, 2024 - 18:02
 0  25
अब मिलेगा तुरंत न्याय, एक जुलाई से देश में लागू होंगे ये 3 नए कानून

आगामी 1 जुलाई से यूपी समेत पूरे भारत में तीन नए आपराधिक कानून (New Criminal Lawa) लागू होने वाले हैं।भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम लागू होगें। इसके लिए यूपी के गाजीपुर में छ लाख लोगों को प्रशिक्षण दिया गया. इसमें कई नए प्रावधान किए गए हैं जो न्याय को सुनिश्चित करते हैं। अब न्यायालय में लंबित आपराधिक मामलों को वापस लेने के लिए पीड़ित को कोर्ट में अपनी बात रखने का पूरा अवसर मिलेगा। न्यायालय पीड़ित को सुनवाई का अवसर दिए बिना मुकदमा वापस लेने की सहमति नहीं देगा।केंद्र सरकार के सूत्रों के मुताबिक राष्ट्रीय आपराधिक रिकॉर्ड ब्यूरो, पुलिस अनुसंधान ब्यूरो और राष्ट्रीय सूचना संचार सेवा ने राज्य सरकारों के साथ मिलकर पुलिस अधिकारियों, न्यायिक अधिकारियों और संबंधित सेवाओं के सवा छह लाख से ज्यादा लोगों को नए नियमों की ट्रेनिंग दी है। 

ई-एफआईआर की व्यवस्था, डिजिटल साक्ष्य को मान्यता

नए कानूनों में ऐसे कई प्रविधान किए गए हैं, जो न्याय की अवधारणा को मजबूत करते हैं। समयबद्ध न्याय के लिए पुलिस व कोर्ट के लिए सीमाएं भी निर्धारित की गई हैं। अंग्रेजों के बनाए कानून खत्म हुए तो पहली बार छोटे अपराधों में सजा के तौर सामुदायिक सेवा का भी प्रविधान किया गया है। पुलिस विवेचना में अब तकनीक का उपयोग अधिक से अधिक होगा। इसके लिए डिजिटल साक्ष्यों को पारंपरिक साक्ष्यों के रूप में मान्यता दी गई है। ई-एफआइआर व जीरो एफआइआर की भी व्यवस्था की गई है। आतंकवाद व संगठित अपराध जैसे नए विषय भी जोड़े गए हैं।

तकनीकि का अधिक प्रयोग

डीजीपी मुख्यालय में गुरुवार नए कानूनों के महत्वपूर्ण पहलुओं पर विस्तार से चर्चा हुई। सूचना प्रसारण मंत्रालय व उप्र पुलिस के इस वार्तालाप कार्यक्रम में डीजीपी प्रशांत कुमार ने कहा कि नए कानूनों की मूल भावना तकनीक का अधिक से अधिक प्रयोग कर यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी स्थित में वादी (शिकायतकर्ता) का उत्पीडन न हो तथा कोई भी निर्दोष व्यक्ति दंडित न हो। विवेचक व इस प्रक्रिया से जुड़े किसी व्यक्ति के विवेक के बजाए किसी निष्कर्म पर पहुंचने की प्रक्रिया तकनीक पर आधारित हो।

फोरेंसिक साक्ष्यों पर अधिक तवज्जो

इसके लिए फारेंसिक साक्ष्यों का उपयोग भी अधिक से अधिक सुनिश्चित कराया जाएगा। कहा, पुलिस के अलावा अभियोजन, कारागार, तकनीकी सेवाएं व प्रशिक्षण के सभी पुलिस अधिकारियों व कर्मियों का प्रशिक्षण कराया गया है। डा.भीमराव अंबेडकर पुलिस अकादमी, मुरादाबाद नए आपराधिक कानून-2023 का विवरण पर एक पाकेट बुक प्रकाशित कर रही है, जिसमें कानूनों का तुलनात्मक विवरण होगा। नए कानून में वीडियो कान्फ्रेंसिंग से गवाही कराने के भी व्यापक प्रबंध किए जा रहे हैं।

महिलाओं और बच्चे के खिलाफ अपराधों की जांच को प्राथमिकता

एडीजी प्रशिक्षण सुनील कुमार गुप्ता ने बताया कि नए कानूनों में महिलाओं व बच्चों के खिलाफ अपराधों की जांच को प्राथमिकता दी गई है। दुष्कर्म व पाक्सो एक्ट के मामलों में जांच दो माह के भीतर पूरी करने की व्यवस्था की गई है। नए कानून के तहत पीड़ित को 90 दिन के भीतर अपने मामले की प्रगति पर नियमित रूप से जानकारी पाने का अधिकार होगा।

पूरी प्रक्रिया की वीडियो ग्राफी

इसके अलावा तलाशी अथवा जब्ती की प्रक्रिया के दौरान वीडियोग्राफी कराना अनिवार्य होगा। सात वर्ष अथवा उससे अधिक की सजा वाले अपराधों में वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाने के लिए फारेंसिक विशेषज्ञ को घटनास्थल पर जाना अनिवार्य होगा। हालांकि इस व्यवस्था को लागू करने के लिए पांच वर्ष की सीमा निर्धारित की गई है।
  
क्या है कानून

1.  विदेश में रहकर अथवा रहने वाला कोई व्यक्ति यदि कोई घटना कराता है तो वह भी आरोपित बनेगा।
2. अपराध में किसी बालक को शामिल कराने वाले को तीन से 10 वर्ष तक की सजा की व्यवस्था की गई है।
3. पांच व उससे अधिक व्यक्तियों की भीड़ द्वारा मूल वंश, जाति, समुदाय, लिंग व अन्य आधार पर किसी व्यक्ति की हत्या पर आजीवन कारावास से मृत्युदंड तक की सजा।
4. राजद्रोह के स्थान पर भारत की संप्रभुता, एकता व अखंडता को खतरे में डालने वाले कार्य को धारा 152 के तहत दंडनीय बनाया गया है।
5 ,  गंभीर अपराध की सूचना पर घटनास्थल पर बिना विचार करे शून्य पर एफआइआर दर्ज होगी। ई-एफआइआर की दशा में सूचना देने वाले व्यक्ति को तीन दिन के भीतर हस्ताक्षर करने होंगे।
6 , एफआइआर की प्रति अब सूचनादाता के साथ-साथ पीड़ित को भी मुफ्त दी जाएगी।
7.  तीन से सात वर्ष से कम की सजा वाले अपराध में थानाध्यक्ष, पुलिस उपाधीक्षक अथवा उससे वरिष्ठ अधिकारी की अनुमति लेकर एफआइआर दर्ज करने से पहले 14 दिन के भीतर प्रारंभिक जांच कर सकेंगे।
8 . दुष्कर्म व एसिड अटैक के मामले में विवेचना के दौरान पीड़िता का बयान महिला मजिस्ट्रेट द्वारा दर्ज किया जाएगा। महिला मजिस्ट्रेट की अनुपस्थिति में पुरुष मजिस्ट्रेट महिला अधिकारी की मौजूदगी में बयान दर्ज करेंगे।
वेबसाइट के लिए
ok

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow