एमपी में 51 साल पुराने कानूून में हुआ बदलाव, नए कानून के तहत पहली FIR भोपाल में दर्ज

देशभर में आज रात 12 बजे से तीन नए आपराधिक कानून लागू हो गए हैं. 51 साल पुराने सीआरपीसी की जगह भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) ले ली है. इसके लागू होते ही राजधानी भोपाल में पहली FIR दर्ज कर ली गई है.

Jul 1, 2024 - 17:09
Jul 1, 2024 - 17:10
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एमपी में 51 साल पुराने कानूून में हुआ बदलाव, नए कानून के तहत पहली FIR भोपाल में दर्ज

आज रात 12 बजे से तीन नए आपराधिक कानून एक जुलाई से देशभर में लागू हो गए हैं, जिससे भारत की आपराधिक न्याय प्रणाली में व्यापक बदलाव आ गया। 51 साल पुराने  भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम ब्रिटिश काल के क्रमश: भारतीय दंड संहिता, दंड प्रक्रिया संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम का स्थान ले लिया हैं।

भोपाल में पहली FIR दर्ज
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता लागू होने के बाद राजधानी भोपाल के हनुमानगंज थाने में 
पहली एफआईआर दर्ज की गई है। मिली जानकारी के अनुसार,  धारा 173 के तहत गाली गलौज की धारा में केस दर्ज किया गया है। यह FIR 40 वर्षीय प्रफुल्ल चौहान ने दर्ज कराई है। जिस आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है उसका नाम राजा उर्फ़ हरभजन है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

नए कानून से क्या होगा बदलाव?
— इस कानूून के तहत किसी भी केस में 3 साल के भीतर न्याय दिलाने का उद्देश्य है। नए कानून के बाद से आपराधिक मामलों में सुनवाई समाप्त होने के 45 दिनों के भीतर फैसला सामने आएगा।  इसमें पहली सुनवाई के 60 दिनों के भीतर आरोप तय किए जाएंगे। 

— इस नए कानून के तहत राजद्रोह अब देशद्रोह माना जाएगा। जो पहले हत्या की धारा पहले 302 थी अब वह 101 होगीै। ट्रायल के मामले में किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तार करने पर पुलिस को उसके परिवार को जानकारी देनी होगी, पहले यह जरूरी नहीं होता था। किसी भी मामले में 90 दिनों में क्या हुआ, इसकी जानकारी पुलिस को पीड़ितों को देनी होगी।

—नाबालिग से रेप के दोषी को उम्र कैद या फांसी की सजा होगी। गैंगरेप के दोषी को 20 साल तक की सजा या आजीवन जेल की सजा होने का प्रावधान है।

—आरोपी अगर 90 दिनों के भीतर कोर्ट के सामने पेश नहीं होता है तो उसकी गैरमौजूदगी में भी ट्रायल होगा। आरोपी और पीड़ित दोनों को 14 दिनों के भीतर एफआईआर, पुलिस रिपोर्ट, चार्जशीट की कॉपी पाने का अधिकार है।

— केस खत्म होने के बाद जज को 43 दिन के अंदर फैसला देना होगा। फैसले के 7 दिन के अंदर सजा सुनानी होगी। नए कानून में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों पर एक नया अध्याय जोड़ा गया है। इसमें बच्चे को खरीदना या बेचना एक जघन्य अपराध माना गया है। इसके लिए कड़ी सजा का प्रावधान है।

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