क्या है भगवान जगन्नाथ की अधूरी मूर्तियों का रहस्य, जानकर हो जाएगें हैरान

Jul 8, 2024 - 17:35
Jul 12, 2024 - 17:55
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क्या है भगवान जगन्नाथ की अधूरी मूर्तियों का रहस्य, जानकर हो जाएगें हैरान

पवित्र जगन्नाथ भगवान की रथ यात्रा 7 जुलाई से प्रारंभ हो गई है, जगन्नाथ पुरी के धार्मिक महत्व के कारण देश ही नहीं सुदूर विदेशी दर्शनार्थी भी श्री जगन्नाथ धाम में आते हैं। पौराणिक कथाओं में इसका वर्णन विस्तार से मिलता है। पवित्र जगन्नाथ धाम को भगवान विष्णु का स्वरूप मानते हैं। ऐसी मान्यता है कि इस धाम में भगवान विष्णु का हृदय विराजमान है। यहां उनके साथ बहन सुभद्रा और भाई बलराम भी रहते हैं। ऐसी माना जाता है कि प्रभु श्रीकृष्ण ने अपने शरीर का त्याग कर दिया तो पांडवोें ने मिलकर उनका दाह संस्कार किया जिससे उनका शऱीर तो जल गया लेकिन हृदय नहीं जल पाया इसलिए जगन्नाथ पुरी में विष्णु भगवान का हृदय सदैव विराजमान रहता है। 

राजा इंद्रद्युमन  को स्वप्न में दिखे श्रीकृष्ण

बाद में जब पांडवों ने उनकी राख को प्रवाहित किया तो वही अवशेष हृदय ने लठ्ठे का रूप ले लिया। जिसकी जानकारी स्वयं भगवान ने राजा इंद्रद्युम्न को दी। राजा इंद्रद्युम्न ने उस लठ्ठे को प्राप्त कर उसकी मूर्तियां बनवायी।इसका कार्य विश्वकर्मा को सौंपा , लेकिन इसके साथ एक शर्त रखी गयी कि जबतक मूर्तियां बनेंगी कोई अंदर नहीं आएगा। नहीं तो मूर्तियों का निर्माण कार्य रुक जाएगा। मूर्तियां बनने की आवाज बंद कमरे से बाहर तक जाती थी जिसे राजा रोज सुना करते थे लेकिन एक दिन आवाज आना बंद हो गया तो राजा ने कमरे का दरवाजा खोल दिया फिर तभी से मूर्तियां बनना भी बंद हो गया. और मूर्तियां अधूरी रह गयी, इन मूर्तियों के हाथ, पंजे और पैर नहीं है।

 

बलराम सबसे आगे बीच में सुभद्रा अंत में भगवान जगन्नाथ का रथ


सनातन धर्म में जगन्नाथ रथ यात्रा का बहुत ही खास महत्व है. मान्यताओं के अनुसार रथयात्रा निकालकर भगवान जगन्नाथ को प्रसिद्ध गुंडिचा मंदिर जाती हैं वहां सात दिन विश्राम करने के बाद वापसी होती है. इस रथ यात्रा में सबसे पहले ताल ध्वज होता है जिसमें बलराम विराजते हैं, फिर उसके पीछे पद्म ध्वज जिसमें सुभद्रा और सुदर्शन होते हैं और अंत में गरुण ध्वज जिसमें भगवान जगन्नाथ स्वयं विराजमान रहते है. जनसामान्य के बीच जाने के बाद वह अपने धाम वापस आ जाते हैं। मान्यता है कि इस रथ यात्रा में शामिल होने सारी मनोकामना पूर्ण होती है और व्यक्ति पाप मुक्त होकर स्वर्ग को प्राप्त होता है। 

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