पंडित प्रदीप मिश्रा के विवादित बयान पर विदिशा में विरोध प्रदर्शन, माफी की मांग

Jun 25, 2024 - 14:02
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पंडित  प्रदीप मिश्रा के विवादित बयान पर विदिशा में विरोध प्रदर्शन,  माफी की मांग

मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के रहने वाले प्रसिद्ध कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं। भगवान कृष्ण और राधा रानी को लेकर उनके द्वारा दिए गए एक विवादित बयान ने उन्हें आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है। इस बयान के बाद संत समाज और विभिन्न धार्मिक संगठनों ने उनकी कड़ी आलोचना की है और माफी मांगने की मांग की है।

संत समाज की नाराजगी

पंडित प्रदीप मिश्रा के इस बयान के खिलाफ संत समाज ने अपनी नाराजगी जताई है। हाल ही में, छत्तीसगढ़ में एक कथा के दौरान प्रदीप मिश्रा ने राधा रानी को लेकर एक बयान दिया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि राधा रानी श्रीकृष्ण की पत्नी नहीं थीं, बल्कि उनका विवाह छाता निवासी अनय घोष के साथ हुआ था। इस बयान के बाद से संत समाज में गहरा आक्रोश है।

विरोध प्रदर्शन

मथुरा के संत प्रेमानंद महाराज ने भी इस बयान पर आपत्ति जताई है, जिसके बाद प्रदीप मिश्रा के खिलाफ नाराजगी और भी बढ़ गई। मध्य प्रदेश के विदिशा में सर्व समाज ने प्रदीप मिश्रा के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया और उनसे माफी मांगने की मांग की। उज्जैन के महर्षि सांदीपनि के वंशज पंडित रूपम व्यास ने तो प्रदीप मिश्रा से नाक रगड़कर माफी मांगने तक की बात कही और उनके आश्रम तथा उज्जैन आने पर प्रतिबंध लगाने की चेतावनी दी।

महापंचायत का अल्टीमेटम

बरसाना में साधु-संतों की एक महापंचायत भी आयोजित की गई, जिसमें बड़ी संख्या में साधु-संत और धार्मिक संगठनों के लोग शामिल हुए। इस महापंचायत ने प्रदीप मिश्रा को चार दिन के भीतर माफी मांगने का अल्टीमेटम दिया है। साधु-संत समाज ने स्पष्ट किया है कि यदि प्रदीप मिश्रा माफी नहीं मांगते, तो उनके खिलाफ कठोर कदम उठाए जा सकते हैं।

कुबेरेश्वर आश्रम

पंडित प्रदीप मिश्रा देश के विभिन्न हिस्सों में प्रवचन देने के लिए प्रसिद्ध हैं। उनका सीहोर जिले में कुबेरेश्वर नामक आश्रम है, जहां शिव की आराधना की जाती है और देशभर से लाखों भक्त यहां आते हैं। हालांकि, वर्तमान में वे अपने विवादित बयान के कारण चर्चाओं में बने हुए हैं।

पंडित प्रदीप मिश्रा के विवादित बयान ने संत समाज और धार्मिक संगठनों को आक्रोशित कर दिया है। इस बयान के बाद से उनके खिलाफ विरोध प्रदर्शन और आलोचनाओं का सिलसिला जारी है। अब यह देखना होगा कि पंडित मिश्रा इस स्थिति का सामना कैसे करते हैं और क्या वे संत समाज की मांगों को पूरा करते हुए माफी मांगेंगे या नहीं। इस विवाद ने धार्मिक समुदाय में एक बड़ी बहस छेड़ दी है और इसके परिणामस्वरूप पंडित मिश्रा की प्रतिष्ठा और उनके आश्रम की गतिविधियों पर गहरा प्रभाव पड़ सकता है।

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