पुतिन-मोदी का याराना, अमेरिका क्यों हो गया परेशान, चीन को भी नहीं हजम हो रही ये दोस्ती

Jul 9, 2024 - 17:10
Jul 11, 2024 - 14:07
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पुतिन-मोदी का याराना, अमेरिका क्यों हो गया परेशान, चीन को भी नहीं हजम हो रही ये दोस्ती

भारत के प्रधानमंत्री मोदी वैसे तो जहां जाते हैं वहां से अलग रिश्ता बना लेते हैं। लेकिन हम बात कर रहे हैं, भारत के सबसे पुराने हमराज, कद्रदान, पुराने सबसे भरोसेमंद दोस्त रूस की। इस समय भारत के प्रधानमंत्री मोदी रूस की दो दिवसीय यात्रा के मद्देनजर मास्को में है। पीएम मोदी सोमवार को जब मास्को पहुंचे तो रूस के राष्ट्रपति पुतिन उन्हें अपने आवास ले गए जहां उनका भव्य स्वागत हुआ। दोनों देशों के शीर्ष नेता एक दूसरे से गर्म जोशी से गले मिले जिसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है । पुतिन और मोदी के बीच की इस कमेस्ट्री से सबसे ज्यादा परेशान अगर कोई हुआ तो वो अमेरिका है, चीन के बाद अमेरिका को भी ये याराना फूटी आंख नहीं सुहाया।

रूस से नजदीकी पर अमेरिका को आपत्ति

रूस के यूक्रेन पर आक्रमण से खफा अमेरिका चाहता है कि भारत रूस से दूर रहे, लेकिन भारत ने अपने हितों को सर्वोपरि रखते हुए अपने पुराने और सबसे भरोसेमंद मित्र रूस से यूक्रेन मामले में दखल देने से इंकार कर दिया । इसी बात पर आज अमेरिका के विदेशी मामलों के प्रवक्ता ब्लूमबर्मग ने प्रेस ब्रीफिंग कर कहा कि रूस ने यूक्रेन पर आक्रमणकर संबंधो को खऱाब किया है और हम चाहते हैं कि भारत रूस से अपने संबंधो को लेकर स्पष्टीकरण दे। 


भारत-रूस की पुरानी दोस्ती, रूस ने पाकिस्तान से 1971 की लड़ाई में की थी मदद 

भारत को जब 1947 में आजादी मिली तो रूस दुनिया का पहला देश था जिसने भारत को अलग राष्ट्र के रूप में सबसे पहले मान्यता दी थी। इसके बाद 1971 की विकट परिस्थिति बांगलादेश मुक्ति वाहिनी के नाम से भारत की सेना चारों ओर से घिर गयी थी और दुनिया का कोई भी देश भारत की मदद के लिए आगे नहीं आ रहा था, उस पर अमेरिका ने पाकिस्तान की मदद के लिए मलक्का स्ट्रेट में अपने मारक जहाज भेज दिया।  तब रूस ने भारत की मदद की थी और अमेरिका की गीदड़ धमकी से मुकाबला करने के लिए अपने जंगी जहाज मलक्का स्ट्रेट में लगाए थे।  

चीन का ऐतराज 

भारत और रूस के संबंधो पर दूसरा सबसे बड़ा ऐतराज चीन को रहा है चीन व्यापारिक और सामरिक दृष्टिकोण से रूस को मिलाकर रखना चाहता है। पावर बैलेंस के मामले में चीन दुनिया में अलग थलग पड़ चुका है , इसलिए वह नहीं चाहता कि भारत और रूस के संबंध व्यापारिक और सैन्य दृष्टिकोण समझौते की दिशा आगे बढ़े। 1993 में सोवियत संघ के टूटने के बाद रूस अभी भी एशिया में ताकतवर माना जाता है। भारत ने 2023 में रूस से एस 400 मिसाइल रक्षा प्रणाली खऱीदे थे तो सबसे ज्यादा आपत्ति चीन ने की थी।आखिरकार चीन अपने दो सबसे बड़े विरोधियों भारत और अमेरिका को एक साथ नहीं देखना चाहेगा। चीन को पता है कि अकेले अमेरिका उसके लिए उतना बड़ा खतरा नहीं है, जितना वह भारत के साथ आने पर बनेगा। चीन ये भी जानता है कि इस समय रूस से संबंध वह कारक है, जो भारत-अमेरिकी संबंधों में कुछ हद तक बाधा बनता है।

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