पुरी की जगन्नाथ यात्रा का शुभारंभ 7 जुलाई से: भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के भव्य रथ निकलेंगे

Jul 6, 2024 - 13:07
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पुरी की जगन्नाथ यात्रा का शुभारंभ 7 जुलाई से: भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के भव्य रथ निकलेंगे

### पुरी की जगन्नाथ यात्रा: अद्वितीय धार्मिक और सांस्कृतिक पर्व

हर साल आषाढ़ मास में ओडिशा के पुरी में प्रसिद्ध जगन्नाथ यात्रा का आयोजन होता है, जो पूरे भारत के चार धामों में से एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है। श्रीजगन्नाथ मंदिर, जो भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित है, धरती का वैकुंठ कहलाता है और इसे नीलांचल, नीलगिरी और शाकक्षेत्र जैसे नामों से भी जाना जाता है। इस वर्ष पुरी की जगन्नाथ यात्रा का शुभारंभ 7 जुलाई, रविवार को हो रहा है। इस भव्य यात्रा में भगवान जगन्नाथ, देवी सुभद्रा और भगवान बलभद्र के रथों का जुलूस निकाला जाता है।

पुरी की रथयात्रा हर साल आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि से प्रारंभ होती है। इस रथ यात्रा के लिए भगवान श्रीकृष्ण, देवी सुभद्रा और भगवान बलभद्र के लिए नीम की लकड़ियों से भव्य रथ तैयार किए जाते हैं। सबसे पहले बड़े भाई बलराम का रथ आता है, बीच में बहन सुभद्रा का रथ और सबसे पीछे भगवान जगन्नाथ श्रीकृष्ण का रथ होता है। इन तीनों रथों के अपने-अपने विशिष्ट नाम और रंग होते हैं। बलराम जी के रथ को तालध्वज कहा जाता है, जिसका रंग लाल और हरा होता है। देवी सुभद्रा के रथ को दर्पदलन या पद्मरथ कहा जाता है, जो काले या नीले रंग का होता है। भगवान जगन्नाथ का रथ नंदिघोष या गरुड़ध्वज कहलाता है, और इसका रंग पीला या लाल होता है। नंदिघोष रथ की ऊंचाई 45 फीट होती है, तालध्वज की 45 फीट और दर्पदलन रथ की ऊंचाई लगभग 44.7 फीट होती है।

जगन्नाथ रथ यात्रा जगन्नाथ मंदिर से शुरू होकर लगभग 3 किलोमीटर दूर स्थित गुंडीचा मंदिर तक जाती है। मान्यतानुसार, यह स्थान भगवान जगन्नाथ की मौसी का घर कहलाता है। एक अन्य मान्यता यह भी है कि विश्वकर्मा ने इसी स्थान पर तीनों प्रतिमाओं का निर्माण किया था और यही भगवान जगन्नाथ की जन्मस्थली है। इस मंदिर में तीनों देवी-देवता 7 दिनों तक विश्राम करते हैं। आषाढ़ मास के दसवें दिन, विधि-विधान से तीनों रथ मुख्य मंदिर की ओर वापस लौटते हैं, जिसे बहुड़ा यात्रा कहा जाता है।

पुरी की जगन्नाथ यात्रा न केवल धार्मिक महत्व रखती है, बल्कि यह सांस्कृतिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। लाखों भक्त इस पर्व में भाग लेने के लिए पुरी आते हैं, जो इस आयोजन को एक अद्वितीय धार्मिक और सांस्कृतिक अनुभव बनाता है। इस यात्रा के माध्यम से भक्त भगवान जगन्नाथ, बलराम और सुभद्रा के प्रति अपनी श्रद्धा और भक्ति व्यक्त करते हैं, जो सदियों से चली आ रही परंपरा और आस्था का प्रतीक है।

इस वर्ष भी, पुरी की सड़कों पर लाखों भक्तों की भीड़ उमड़ेगी, जो भगवान जगन्नाथ के दर्शन और आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए उमंग और उल्लास के साथ इस अद्वितीय यात्रा में शामिल होंगे। इस धार्मिक यात्रा का हर पल भक्तों के दिलों में अनंत श्रद्धा और प्रेम की भावना भर देता है, जो इस पर्व की महिमा को और बढ़ा देता है।

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