फ्रांस में सत्ता परिवर्तन: मैक्रों की पार्टी चुनाव में हारी, वामपंथी गठबंधन को मिली बढ़त, गैब्रियल अट्टल का इस्तीफा

Jul 8, 2024 - 13:07
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फ्रांस में सत्ता परिवर्तन: मैक्रों की पार्टी चुनाव में हारी, वामपंथी गठबंधन को मिली बढ़त, गैब्रियल अट्टल का इस्तीफा

ब्रिटेन में सत्ता परिवर्तन के बाद फ्रांस में भी आम चुनावों के नतीजों ने राजनीति का परिदृश्य बदल दिया है। रविवार को हुए आम चुनावों में राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा। सोमवार को घोषित आंकड़ों के अनुसार, कुल 577 सीटों में से वामपंथी न्यू पॉपुलर फ्रंट गठबंधन ने 182 सीटें जीतीं। इमैनुएल मैक्रों की रेनेसां पार्टी को केवल 163 सीटें मिलीं, जबकि दक्षिणपंथी नेशनल रैली गठबंधन को 143 सीटों पर संतोष करना पड़ा। किसी भी दल को बहुमत नहीं मिलने से फ्रांस में गठबंधन सरकार बनना तय हो गया है।

चुनाव परिणाम और हिंसा

चुनाव के परिणाम सामने आने के बाद फ्रांस में हिंसा भड़क उठी। वामपंथी गठबंधन की बढ़त के कारण राजधानी पेरिस समेत देश के विभिन्न हिस्सों में तनाव फैल गया। चुनाव नतीजों के बाद प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए और आगजनी एवं उपद्रव करने लगे। वीडियो फुटेज में प्रदर्शनकारियों को आग जलाते और तोड़फोड़ करते देखा गया है। हालात को काबू में करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और बड़ी संख्या में सुरक्षाबल तैनात किए गए हैं।

प्रधानमंत्री का इस्तीफा

चुनाव परिणामों के बाद हार की जिम्मेदारी लेते हुए प्रधानमंत्री गैब्रियल अट्टल ने अपने पद से इस्तीफे की पेशकश की है। उन्होंने कहा कि जब तक नया प्रधानमंत्री नहीं चुना जाता, वह अपने पद पर बने रहेंगे। गैब्रियल अट्टल ने स्वीकार किया कि बहुमत न होने के कारण उनके लिए पद पर बने रहना मुश्किल हो गया है। उनकी पार्टी की हार के बाद, देश में जारी हिंसा और तनाव को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है।

गठबंधन सरकार की चुनौती

फ्रांस में गठबंधन सरकार का कार्यकाल 2027 तक था, लेकिन यूरोपीय संघ में मिली बड़ी हार के कारण राष्ट्रपति मैक्रों ने संसद भंग कर दी। रिपोर्टों के अनुसार, गठबंधन सरकार के चलते कई बिल पास कराने में दिक्कतें आ रही थीं और हर बार समर्थन जुटाना मुश्किल हो रहा था। चुनाव परिणामों के बाद, राष्ट्रपति मैक्रों ने स्पष्ट किया कि वह अपने पद से इस्तीफा नहीं देंगे, भले ही उनकी पार्टी संसद में हार गई हो। हालांकि, नियमों के अनुसार, यदि उनकी पार्टी को संसद में हार का सामना करना पड़ता है, तो उन पर इस्तीफे का दबाव बढ़ सकता है।

इस राजनीतिक उथल-पुथल ने फ्रांस के राजनीतिक भविष्य को अनिश्चित बना दिया है। सभी दलों के नेताओं और जनता की निगाहें अब इस पर टिकी हैं कि अगली सरकार कैसे बनेगी और देश में स्थिरता कैसे लौटेगी।

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