मध्य प्रदेश के सभी कॉलेजों में समान ड्रेस कोड लागू करने की तैयारी, 'हिजाब विवाद' के बाद लिया गया है निर्णय

Jul 10, 2024 - 12:25
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मध्य प्रदेश के सभी कॉलेजों में समान ड्रेस कोड लागू करने की तैयारी, 'हिजाब विवाद' के बाद लिया गया है निर्णय

मध्य प्रदेश की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार राज्य के सभी सरकारी और प्राइवेट कॉलेजों में छात्रों के लिए समान यूनिफॉर्म या ड्रेस कोड लागू करने की योजना बना रही है। राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने मंगलवार को घोषणा की कि सभी सरकारी और प्राइवेट कॉलेजों को अपने छात्रों के लिए एक समान ड्रेस कोड लागू करने का निर्देश दिया गया है।

'हिजाब विवाद' के बाद आया निर्णय

पिछले साल कर्नाटक समेत कई राज्यों में 'हिजाब विवाद' के बाद एमपी सरकार ने यह फैसला लिया है। इस कदम के पीछे का तर्क बताते हुए, एक अधिकारी ने कहा कि "बुर्का, हिजाब और साड़ी" जैसे परिधान छात्रों के बीच "मतभेद" पैदा करते हैं।

मतभेदों को समाप्त करने की कोशिश

मध्य प्रदेश में वर्तमान में केवल 50% कॉलेजों में ड्रेस कोड है। बुर्का, हिजाब और साड़ी जैसे कपड़े छात्रों के बीच मतभेद पैदा कर रहे थे, इसलिए मुख्यमंत्री मोहन यादव और उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने सभी कॉलेजों में ड्रेस कोड लागू करने का निर्णय लिया है।

नया शैक्षणिक सत्र और ड्रेस कोड

उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि नया यूनिफॉर्म कोड इस महीने के अंत में शुरू होने वाले नए शैक्षणिक सत्र से लागू होगा। उन्होंने यह भी कहा, "हमने राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू की है और सभी बातों को ध्यान में रखते हुए हम एक आदर्श ड्रेस कोड लागू करेंगे। किसी वर्ग को आपत्ति नहीं होगी। हम समाज के सभी वर्ग के साथ कॉलेज में सकारात्मक माहौल बनाने और ड्रेस कोड के महत्व को बताते हुए इसे लागू करेंगे।"

एकरूपता और अनुशासन की ओर कदम

परमार का कहना है कि कॉलेज के छात्रों के बीच एकरूपता लाने की कोशिश की जा रही है। ड्रेस कोड के माध्यम से, छात्र अनुशासन सीखेंगे और समान व्यवहार का अनुभव करेंगे। एक जैसी ड्रेस पहनने से सभी छात्र एक जैसे दिखेंगे और भेदभाव की संभावना कम होगी।

विपक्ष की प्रतिक्रिया

विपक्ष ने इस कदम की आलोचना की है। कांग्रेस प्रवक्ता कुणाल चौधरी ने कहा कि सरकार का ध्यान राज्य में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने पर होना चाहिए। उन्होंने कहा, "बीजेपी सरकार ने कर्नाटक से कुछ नहीं सीखा है, जहां उन्होंने विधानसभा चुनाव से पहले हिजाब पर प्रतिबंध को एक बड़ा मुद्दा बनाया और चुनाव हार गए। अब, वे ड्रेस कोड जैसे मुद्दे लाकर छात्रों को शिक्षा और रोजगार की मांग से भटका रहे हैं।"

कांग्रेस सांसद आरिफ मसूद का बयान

मध्य प्रदेश में कांग्रेस सांसद आरिफ मसूद का कहना है कि कर्नाटक में भी हिजाब विवाद बेवजह था। सरकार हिजाब और बुर्का को लेकर छींटाकशी करना चाहती है, जिसे मध्य प्रदेश में पसंद नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा, "लड़कियां अगर हिजाब पहन रही हैं तो इसमें बुराई क्या है। प्रतिबंध नहीं होना चाहिए, लड़की को यह चुनने का अधिकार होना चाहिए कि उसे हिजाब पहनना है या नहीं।"

सरकारी आदेश का हवाला

एक अन्य सरकारी अधिकारी ने राज्य के सभी कॉलेजों को जारी किए गए सरकारी आदेश का हवाला देते हुए कहा, "हमने यह तय करने का काम अलग-अलग कॉलेजों पर छोड़ दिया है कि वे अपने छात्रों के लिए किस तरह की यूनिफॉर्म चाहते हैं। हमारे आदेश में यह साफ है कि ड्रेस में एकरूपता होनी चाहिए।"

इस निर्णय के साथ, सरकार ने यह सुनिश्चित करने की कोशिश की है कि छात्रों के बीच कोई भेदभाव न हो और सभी को समानता और अनुशासन का अनुभव हो।

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