भारतीय कृषि क्षेत्र के लिए बड़ी कामयाबी: बासमती चावल निर्यात में 15.7% का रिकॉर्ड उछाल

Basmati rice exports: वैश्विक स्तर पर मिडिल ईस्ट में अस्थिरता और ईरान-इजरायल टेंशन के बाद भी भारत के बासमती चावल निर्यात ने वित्त वर्ष 2024-25 में शानदार प्रदर्शन किया है। वाणिज्यिक जानकारी एवं सांख्यिकी महानिदेशालय के आंकड़ों के अनुसार, भारत ने इस वित्त वर्ष में बासमती चावल निर्यात में 1,923 करोड़ रुपये की ग्रोथ हासिल की है। बढ़ता निर्यात भारतीय कृषि क्षेत्र के लिए भी एक बड़ी कामयाबी मानी जा रहा है।

डीजीसीआईएस के आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2024-25 में दुनिया भर में भारत के बासमती चावल की डिमांड में भारी वृद्धि दर्ज हुई है। इस दौरान भारत ने 50,312 करोड़ रुपये यानि लगभग 5.87 अरब डॉलर मूल्य के बासमती चावल का निर्यात किया। यह आंकड़ा पिछले वित्त वर्ष 2023-24 के 48,389 करोड़ रुपये 5.74 अरब डॉलर की तुलना में 3.97% ज्यादा है। पिछले वर्ष 52.42 लाख मीट्रिक टन बासमती चावल का निर्यात हुआ था।

ये हैं बासमती चावल के सबसे बड़े खरीदार देश

सऊदी अरब भारत के बासमती चावल का मूल्य के आधार पर सबसे बड़ा आयातक देश रहा। जिसने 10,190.73 करोड़ रुपये वैल्यू के बासमती चावल खरीदा। इसके अलावा इराक ने 7,201 करोड़ रुपये, ईरान ने 6,374 करोड़ रुपये, संयुक्त अरब अमीरात ने 3,089 करोड़ रुपये, यमन ने 3,038.56 करोड़ रुपये, और अमेरिका ने 2,849 करोड़ रुपये वैल्यू के बासमती चावल खरीदा। भारत के बासमती चावल के अन्य प्रमुख यूके , कुवैत , ओमान और कतर हैं।