विश्व अस्थि एवं जोड़ देखभाल दिवस के अवसर पर चिकित्सा विशेषज्ञ हड्डियों, जोड़ों और मांसपेशियों की देखभाल को प्राथमिकता देने का संदेश दे रहे हैं। विशेष रूप से मध्य भारत में, घुटने और जोड़ों के दर्द से पीड़ित मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
आज की भागदौड़ भरी लेकिन बैठी जीवनशैली, अनुचित पोश्चर और हड्डियों के स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता की कमी ने न केवल बुजुर्गों में, बल्कि युवाओं में भी गठिया, पुराने जोड़ों के दर्द और गतिशीलता संबंधी समस्याएं बढ़ा दी हैं। इससे निपटने के लिए आधुनिक चिकित्सा अब सर्जरी-रहित विकल्पों की ओर बढ़ रही है। इनमें प्लेटलेट-रिच प्लाज्मा (पीआरपी) थेरेपी एक प्रमुख भूमिका निभा रही है। नागपुर के वरिष्ठ और ख्यातिप्राप्त आॅथोर्पेडिक सर्जन डॉ. आकाश साओजी बताते हैं, पीआरपी थेरेपी घुटने के आॅस्टियोआर्थराइटिस, लिगामेंट इंजरी और पुराने टेंडन दर्द जैसी समस्याओं के लिए एक सुरक्षित, वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित उपचार है। जो मरीज सर्जरी से बचना चाहते हैं, उनके लिए यह एक प्रभावी विकल्प सिद्ध हो रहा है। मध्य भारत में, घुटने और जोड़ों के दर्द से पीड़ित मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिससे यह विषय और भी प्रासंगिक हो गया है।
ऊतकों की प्राकृतिक मरम्मत को प्रोत्साहित करती है यह प्रक्रिया
यह तकनीक रोगी के अपने रक्त से प्राप्त सेल्स और प्लेटलेट्स का विशेष सांद्रण बनाकर उसे घुटने या जोड़ों में इंजेक्ट करती है। यह प्रक्रिया ऊतकों की प्राकृतिक मरम्मत को प्रोत्साहित करती है, सूजन कम करती है और दर्द से राहत दिलाने में मदद करती है—वह भी बिना किसी बड़ी सर्जरी के। घुटनों की रिप्लेसमेंट सर्जरी से बचना हजारों मरीजों के लिए राहत की बात है, विशेष रूप से गंभीर गठिया की स्थिति में भी। डॉ. साओजी द्वारा जर्मनी में पेटेंट कराया गया पीआरपी क्लाउड’ तकनीक आधारित समाधान, पीआरपी थेरेपी को और अधिक प्रभावी बनाता है। इस दिवस के अवसर पर नागरिकों को हड्डियों और जोड़ों की देखभाल के लिए नियमित व्यायाम, संतुलित आहार, कैल्शियम और विटामिन ऊ की पूर्ति, और समय-समय पर चेकअप की सलाह दी जाती है। विश्व अस्थि एवं जोड़ देखभाल दिवस हमें याद दिलाता है कि समय रहते की गई देखभाल जीवन की गुणवत्ता को बढ़ा सकती है, और आने वाले वर्षों तक सक्रिय और दर्द-मुक्त जीवन सुनिश्चित कर सकती है।