शहर के 4 कोनों में बनने हैं ISBT,  तीन को अब तक जगह का इंतजार

प्रदेशटुडे संवाददाता, भोपाल: राजधानी भोपाल में बढ़ती भीड़भाड़ को देखते हुए शहर के चार कोनों में आईएसबीटी निर्माण का प्रस्ताव है। लेकिन प्रशासननिक लापरवाही के चलते एक दशक पहले की प्लानिंग पर कार्य अब तक शुरू नहीं हुआ है। तीन आईएसबीटी के लिए जमीन तक नहीं मिली है। वहीं, विद्या नगर के आईएसबीटी का कार्य लगभग पूरा होने वाला है। यह कुछ माह में बनकर तैयार हो जाएगा। 

 खजूरी कलां में 53 करोड़ की लागत से नए आईएसबीटी के निर्माण को नगर निगम और बीडीए की मंजूरी मिली गई थी, लेकिन अब तक जमीन फाइनल न होने से काम शुरू नहीं हो सका है। वहीं बैरसिया रोड पर आईएसबीटी बनाया जाना था। ताकि शहर से बसें यहां आकर खड़ी हो सकें। लेकिन यहां भी जमीन नहीं मिलने से काम शुरू नहीं हुआ है। जबकि बैरागढ़ में प्रस्तावित आईएसबीटी सीहोर नाके पास बनाया जाना है, लेकिन जमीन नहीं मिलने से यहां भी काम शुरू नहीं हो सका है।  नर्मदापुरम रोड पर विद्यानगर फेस-2 में पांच एकड़ में 92 करोड़ की लागत से आईएसबीटी अगले कुछ माह में तैयार हो जाएग। यहां दो फ्लोर की बेसमेंट पार्किंग की दो बिल्डिंग बनाई जा रही है। इसमें दो फ्लोर ऊपर दुकानों के लिए हैं। जिसकी एक बिल्डिंग का का पूरा हो चुका है। वहीं दूसरी बिल्डिंग का काम चल रहा है

राजधानी में क्यों पड़ रही नए आईएसबीटी की जरूरत

 आरिफ नगर बस स्टैंड बन जाने से पुतलीघर व नादरा पहुंचने वाली बसें आरिफ नगर में रुकेंगी। नादरा बस स्टैंड मेटो की वजह से खत्म हो गया है। बैरसिया रोड पर इसे शिफ्ट किया जाना है। हबीबगंज आईएसबीटी छोटा पड़ने लगा है। हबीबगंज से 11 मील तक कोई और बस स्टैंड नहीं है। ऐसे में यहां बीडीए विद्या नगर  बस स्टैंड बना रहा है। हलालपुरा बस स्टैंड अब खत्म हो गया है। अभी शहर में हबीबगंज स्थित कुशाभाऊ ठाकरे आईएसबीटी के साथ ही नादरा बस स्टैंड, हलालपुर बस स्टैंड हैं। 

छह साल बाद भी आरिफ नगर बस स्टैंड का काम अधूरा

नदरा बस स्टैंड और पुतिली घर बस स्टैंड को आरिफ नगर में बन रहे बस स्टैंड में शिफ्ट किया जाना है, लेकिन यहां छह साल बाद भी काम पूरा नहीं हुआ है। अभी तक यहां 80 फीसदी काम ही हुआ है, जबकि डेडलाइन दो साल की थी। आरिफ नगर बस स्टैंड का निर्माण नगर निगम करवा रहा है। इस पर 16 करोड़ रुपए से अधिक खर्च हो रहे हैं। यहां एक समय 150 बसें खड़ी  की जा सकेंगी। आरिफ नगर बस स्टैंड का काम डेडलाइन के हिसाब से तीन साल पहले ही पूरा हो जाना चाहिए था। फेज-3 में 100 लोगों के बैठने के लिए यात्री प्रतीक्षालय, दो सुलभ शौचालय और 30 दुकानें बनना है।