अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने जेनेरिक दवाओं पर आयात शुल्क (टैरिफ) लगाने की योजना को फिलहाल ठंडे बस्ते में डाल दिया है। यह फैसला भारतीय फार्मा कंपनियों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है, क्योंकि अमेरिका में उपयोग की जाने वाली लगभग 50 प्रतिशत जेनेरिक दवाएं भारत से आयात की जाती हैं। इस फैसले से उन लाखों अमेरिकी नागरिकों को भी राहत मिली है जो हाई ब्लड प्रेशर, डिप्रेशन, अल्सर और कोलेस्ट्रॉल जैसी बीमारियों के इलाज के लिए सस्ती भारतीय जेनेरिक दवाओं पर निर्भर हैं। अमेरिका में फार्मेसियों में बेची जाने वाली कुल जेनेरिक दवाओं में से 47 प्रतिशत दवाएं भारत से आती हैं। अमेरिका के घरेलू निर्माता करीब 30 प्रतिशत की हिस्सेदारी रखते हैं, जबकि बाकी हिस्सा अन्य देशों से आता है।
भारतीय दवाओं से अमेरिकी स्वास्थ्य प्रणाली को मिली भारी बचत
अनुमानों के अनुसार, साल 2022 में भारतीय जेनेरिक दवाओं ने अमेरिकी स्वास्थ्य प्रणाली को करीब 219 अरब डॉलर की बचत कराई। पिछले एक दशक में यह बचत 1.3 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गई। ऐसे में, ट्रंप प्रशासन ने शायद यह महसूस किया कि जेनेरिक दवाओं पर टैरिफ लगाकर जनता को एक और कड़वी दवा नहीं दी जा सकती। वहीं जब ट्रंप ने दवाओं पर टैरिफ लगाया, इसका अमेरिका में भी जोरदार विरोध हुआ।
लगातार विरोध
ट्रंप पहले भी अपनी टैरिफ घोषणाओं के कारण आलोचनाओं में रहे है। यह मामले कोर्ट भी पहुंचे हैं। एक यूजर्स ने सोशल मीडिया पर नाराजगी जताते हुए लिखा, सरकार हमसे पैसा वसूल रही है और वही पैसा हमें वापस दे रही है।