2 दर्जन से ज्यादा बच्चों की मौत के बाद अब 3 गुना बढ़ाएंगे दवा जांच की क्षमता

प्रदेश में दवाओं की जांच को लेकर कंट्रोलर फूड एण्ड ड्रग्स के अफसर अब तक सुस्त थे, इसके चलते प्रदेश में दवाओं के लगभग 5500 नमूने जांच के लिए पेडिंग हैं। यह तय किया है कि अब हर साल लगभग 20 हजार दवा नमूनों की जांच की जाएगी, जबकि फिलहाल करीब 6 हजार नमूनों की ही जांच प्रदेश में संभव है। इस पहल का उद्देश्य मिलावटी सिरप और दूषित दवाओं की समय रहते पहचान कर जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। छिंदवाड़ा में कफ सिरप की जांच में भी इस कारण से ज्यादा समय लग गया था, हालांकि अफसरों ने अपने बचाव के लिए दशहरा के शासकीय अवकाश का हवाल देकर अपने आप को बचाने का प्रयास किया, लेकिन ऐसी गंभीर और संवदेनशील स्थिति में यह जांच तत्काल होना थी।

केंद्र को भेजेंगे 200 करोड़ का प्रस्ताव

इन सब से अब सबक लिया जा रहा है और केंद्र सरकार को 200 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजे जाने की योजना पर काम किया जा रहा है। इसमें भोपाल, इंदौर और जबलपुर की मौजूदा तीन दवा परीक्षण प्रयोगशालाओं के साथ ग्वालियर में निर्माणाधीन चौथी प्रयोगशाला को भी उन्नत करने की योजना है। इसी तरह, राज्य सरकार से भी 180 करोड़ रुपये की अतिरिक्त मांग की जाएगी ताकि दवा परीक्षण ढांचे को पूरी तरह आधुनिक बनाया जा सके। दोनों सरकारों से राशि स्वीकृत होने पर प्रयोगशालाओं के उन्नयन का कार्य शुरू होने की संभावना है। इसके तहत माइक्रो लैब की स्थापना, जांच उपकरणों का आधुनिकीकरण और प्रशिक्षण सेल का गठन किया जाने का प्रस्ताव है। साथ ही लगभग 100 नए वैज्ञानिक और तकनीकी कर्मचारियों की भर्ती की भी योजना है, ताकि जांच प्रक्रिया तेज और सटीक हो सके। भर्ती के संबंध में शासन को जल्द ही प्रस्ताव भेजा जा सकता है। दवा परीक्षण प्रयोगशालाओं के उन्नयन के लिए मंत्रालय में उच्चस्तरीय बैठक आयोजित हो चुकी है।