भोपाल: शहर के जाने माने राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) में 20 करोड़ से हुए नए निर्माण और अपग्रेडेशन के कामों में भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। इस गड़बड़ी से आरजीपीवी में की साख दांव पर लग गई है। बताया जाता है कि इन कामों की अब जांच होगी। इसके लिए कमेटी का गठन किया गया है। जानकारी के अनुसार, राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (रूसा) के तहत मिली ग्रांट में यह मामला सामने आया है। बताया जाता है कि विश्वविद्यालय को 2020 में 20 करोड़ रुपये की ग्रांट मिली थी। विवि के अधिकारी अब तक इसके तहत हुए कामो का उपयोगिता प्रमाण पत्र नहीं दे पाए हैं। सूत्रों के अनुसार, रूसा की ओर से 10 करोड़ रुपए नए निर्माण और अपग्रेडेशन के लिए और 10 करोड़ रुपए नए निर्माण और अपग्रेडेशन (उपकरण और संसाधन खरीद) के लिए स्वीकृत किए गए थे। ये राशि 13 विभागों के माध्यम से खर्च की जानी थी। अभी तक 12 करोड़ रुपए से अधिक खर्च किए जा चुके हैं। रूसा की ओर से कई पत्र लिखे जाने के बाद भी जब उपयोगिता प्रमाण-पत्र नहीं दिया गया तो विवि प्रशासन को संदेह हुआ और एक जांच कमेटी का गठन किया गया। कमेटी की शुरूआती जांच में ही भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। आरजीपीवी के रजिस्ट्रार डॉ. मोहन सेन ने बताया कि रूसा संचालनालय को उपयोगिता प्रमाण- पत्र भेजे जाने हैं। इसके सत्यापन के लिए संबंधित अधिकारी सहयोग नहीं कर रहे हैं। इसलिए जांच शुरू कराई गई है। बिना सत्यापन के प्रमाण-पत्र नहीं दिए जा सकते हैं। जांच में गड़बड़ी पाई जाने पर जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।