अखिलेश की तंज: बिहार में 202 की डबल सेंचुरी हजम नहीं हो रही, बीजेपी की मशीनरी से सीखने की बात

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने रविवार को बेंगलुरु में बिहार विधानसभा चुनाव के परिणामों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि एनडीए की यह जीत आसानी से पच नहीं रही। उन्होंने स्वीकार किया कि चुनाव में जीत या हार होती रहती है और वे इससे लगातार सीखते हैं। अखिलेश ने बीजेपी की चुनावी रणनीति की तारीफ की, खासकर उनकी ग्रासरूट स्तर तक पहुंचने वाली मशीनरी और कामकाज के तरीके को।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि बीजेपी अब दावा कर रही है कि महिलाओं ने उन्हें भारी वोट दिए। यह कहा जा सकता है कि महिलाओं का समर्थन ज्यादा मिला, लेकिन सवाल यह है कि 10 हजार रुपये की मदद कब तक दी जाती रहेगी? कब महिलाओं को सम्मानजनक जीवन मिलेगा? अखिलेश ने आरोप लगाया कि अब यह राशि उन महिलाओं को दी जा रही है, जिनके पति उनके साथ नहीं रह पाते। यह स्थिति बेहद दुखद है।

मीडिया खबरों के अनुसार, अखिलेश ने बिहार और उत्तर प्रदेश को प्रवासियों की बड़ी संख्या वाला राज्य बताया। यहां से लोग परिवार छोड़कर दूसरे राज्यों में काम की तलाश में जाते हैं। सरकार परिवारों को एकजुट रखने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा रही। बस 10 हजार रुपये देकर वोट हासिल करने की कोशिश की जाती है। बाद में, जैसे अन्य राज्यों में हुआ, राशि घटा दी जाती है या नए नियम थोप दिए जाते हैं, जिससे मां-बहनों को मदद मिलनी बंद हो जाती है। महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में यही पैटर्न देखने को मिलता है।

एनडीए की भारी सफलता पर अखिलेश ने व्यंग्य करते हुए कहा, “202-डबल सेंचुरी! यह हजम नहीं हो रही।” वे परिणामों को समझने में असमर्थ दिखे। उन्होंने तर्क दिया कि अगर कोई पार्टी 200 सीटें जीत सकती है, तो जहां सीटें ज्यादा हों—70-80 प्रतिशत—वहां कोई भी दल जीत सकता है। जो पार्टियां 90 प्रतिशत आबादी के लिए काम कर रही हैं, वे इससे बेहतर कर सकती हैं। यह बेंचमार्क है, तो हमें इसे पार करना होगा।

अखिलेश ने हार से सीखने की बात दोहराई और कहा कि जब आप नीचे पहुंचते हैं, तभी ऊपर चढ़ने के तरीके सोचते हैं। उन्होंने याद दिलाया कि कभी उनकी पार्टी को सिर्फ 5 सीटें मिली थीं, तब सरकार बनाने में नाकाम रहे। फिर डबल इंजन की सरकार आई, लेकिन उन्होंने दोनों को हराकर इतनी सीटें गंवाईं कि विरोधी अब भी कल्पना नहीं कर पाते।

उन्होंने आगे कहा कि बिहार की जीत उत्तर प्रदेश की जीत के समान नहीं हो सकती। यूपी में अलग तरह की जीत हुई थी, बिहार की अलग है। बिहार जीता जा सकता है, लेकिन यूपी में जो हुआ, वह सबने देखा। अब बिहार की इस जीत को यूपी में बदलने का मौका है और इसके लिए वे पूरी तरह तैयार हैं। यूपी विधानसभा चुनाव अब दूर नहीं हैं।