केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने गुरुवार को लोकसभा में कहा कि भारत की ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री तेज गति से आगे बढ़ रही है और निकट भविष्य में यह विश्व की सबसे बड़ी ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री बन जाएगी।
उन्होंने बताया कि जब उन्होंने 2014 में मंत्री का कार्यभार संभाला था, तब भारत विश्व में सातवें स्थान पर था, लेकिन अब जापान को पीछे छोड़ते हुए भारत तीसरे नंबर पर पहुंच गया है।
गडकरी ने कहा कि वर्तमान में अमेरिका 79 लाख करोड़ रुपये के साथ सबसे बड़ा ऑटोमोबाइल बाजार है, चीन 49 लाख करोड़ रुपये के साथ दूसरे स्थान पर है, जबकि 22 लाख करोड़ रुपये के बाजार आकार के साथ भारत अब तीसरे स्थान पर काबिज हो चुका है।
मंत्री ने जोर देकर कहा कि देश हर साल लगभग 22 लाख करोड़ रुपये का पेट्रोल-डीजल आयात करता है। इस आयात बिल को कम करने के लिए सरकार वैकल्पिक ईंधन और बायोफ्यूल को बढ़ावा दे रही है। इस दिशा में पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। ग्रीन हाइड्रोजन मिशन और अन्य वैकल्पिक ईंधन परियोजनाएं इसी लक्ष्य को पूरा करने के लिए चल रही हैं।
उन्होंने बताया कि ये विकल्प न केवल आयात पर निर्भरता कम करेंगे, बल्कि लागत में भी कमी लाएंगे और प्रदूषण मुक्त होंगे, जो दिल्ली जैसे शहरों में बढ़ते वायु प्रदूषण की समस्या का स्थायी समाधान बन सकते हैं।
इलेक्ट्रिक वाहनों के क्षेत्र में तेज प्रगति की बात करते हुए गडकरी ने कहा कि फास्ट चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़े पैमाने पर काम चल रहा है। सभी तरह के वाहनों, चाहे ट्रक-बस हों या दोपहिया-तिपहिया, के लिए एक समान और तेज चार्जिंग सिस्टम विकसित किया जा रहा है। इस समय केवल इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन सेगमेंट में ही 400 से अधिक स्टार्टअप काम कर रहे हैं और लगातार नए इनोवेशन सामने आ रहे हैं।
ऑटो इंडस्ट्री को बढ़ावा देने के लिए हाल में किए गए जीएसटी सुधारों का जिक्र करते हुए मंत्री ने कहा कि वाहनों पर कर की दरों में की गई भारी कटौती से बिक्री को जबरदस्त बल मिला है और आगे भी उद्योग को हर संभव सहयोग दिया जाएगा।
गडकरी ने विश्वास जताया कि वैकल्पिक ईंधन, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और नीतिगत सुधारों के दम पर भारत बहुत जल्द विश्व की नंबर-1 ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री बनेगा।