बिजली बिल और अन्य मांगों को लेकर DC दफ्तरों पर प्रदर्शन, 20 से ‘रेल रोको’ की चेतावनी

पंजाब में किसान-मजदूर मोर्चा (भारत) और उससे जुड़े विभिन्न संगठनों ने केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ एक बार फिर मोर्चा खोल दिया है। अपनी कई लंबित मांगों को लेकर आज से पूरे पंजाब के जिला कलेक्टर (DC) कार्यालयों के बाहर अनिश्चितकालीन धरने शुरू कर दिए गए हैं। अमृतसर में आयोजित विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में किसान और मजदूर शामिल हुए, जहाँ उन्होंने सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

सरकार की चुप्पी पर भड़के किसान नेता पंधेर

प्रदर्शन को संबोधित करते हुए प्रमुख किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने सरकार के रवैये पर कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने कहा कि किसानों और मजदूरों की जायज मांगों को लेकर 1 दिसंबर को ही मांग पत्र सौंप दिया गया था, लेकिन 16 दिन बीत जाने के बाद भी सरकार की ओर से कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली है। पंधेर ने दो टूक चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर जल्द सुनवाई नहीं की, तो 20 दिसंबर से पूरे राज्य में ‘रेल रोको आंदोलन’ शुरू किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

बिजली संशोधन बिल 2025 को वापस लेने की मुख्य मांग

किसानों के इस आंदोलन का मुख्य केंद्र ‘बिजली संशोधन बिल 2025’ है। सरवन सिंह पंधेर ने मांग की है कि:

  • बिल की वापसी: केंद्र सरकार तुरंत विवादित बिजली संशोधन बिल 2025 को रद्द करे।
  • राज्य सरकार का प्रस्ताव: पंजाब सरकार विधानसभा में सर्वदलीय सहमति के साथ इस बिल के खिलाफ एक कड़ा प्रस्ताव पारित करे।
  • निजीकरण पर रोक: बिजली विभाग के निजीकरण की प्रक्रिया और ठेका प्रथा को पूरी तरह बंद कर स्थायी कर्मचारियों की भर्ती की जाए।
  • प्रीपेड मीटर का विरोध: पंजाब में जबरन प्रीपेड मीटर लगाने की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाई जाए।

नुकसान की भरपाई और अन्य लंबित मुद्दे

मोर्चे ने शंभू और खनौरी बॉर्डर पर चल रहे आंदोलन के दौरान हुए नुकसान की भरपाई की भी पुरजोर मांग की है। किसान नेताओं का कहना है कि सरकार किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारने के बजाय उन पर नई नीतियां थोप रही है, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। फिलहाल, राज्य के सभी जिला मुख्यालयों पर भारी पुलिस बल तैनात है और प्रशासन किसानों को समझाने का प्रयास कर रहा है, लेकिन किसान अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं।