हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला डिग्री कॉलेज की छात्रा पल्लवी की रैगिंग और प्रताड़ना के बाद हुई मौत के मामले में कानूनी और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। जिला अदालत ने मामले के मुख्य आरोपी, भूगोल के प्रोफेसर अशोक कुमार को 12 जनवरी तक के लिए अंतरिम जमानत दे दी है। कोर्ट ने यह राहत इस शर्त पर दी है कि प्रोफेसर जांच में पूरा सहयोग करेंगे।
36 घंटे बाद भी गिरफ्तारी नहीं, पुलिस के पास ‘डाइंग डिक्लेरेशन’ ही सहारा
छात्रा के परिजनों की शिकायत पर प्रोफेसर अशोक कुमार और तीन छात्राओं (हर्षिता, आकृति और कोमोलिका) के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। पल्लवी ने मौत से पहले एक वीडियो बयान जारी किया था, जिसमें उसने छात्राओं पर मारपीट और रैगिंग, जबकि प्रोफेसर पर ‘बैड टच’ और मानसिक प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए थे। चूंकि छात्रा का अंतिम संस्कार हो चुका है और पोस्टमॉर्टम नहीं हुआ, इसलिए पुलिस अब छात्रा के मृत्यु पूर्व बयान (Dying Declaration), मेडिकल रिपोर्ट्स और डिजिटल साक्ष्यों पर ही निर्भर है।
यूजीसी की ‘फैक्ट-फाइंडिंग’ कमेटी और सीएम का कड़ा रुख
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए कॉलेज को एक फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी बनाने का निर्देश दिया है। यूजीसी ने स्पष्ट किया है कि कॉलेज के एंटी-रैगिंग सिस्टम की भी जांच होगी और दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। वहीं, मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने छात्रा के बयान के आधार पर प्रोफेसर को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड करने के निर्देश जारी कर दिए हैं।
क्या था पूरा मामला?
द्वितीय वर्ष की छात्रा पल्लवी का आरोप था कि कॉलेज की तीन छात्राओं ने उसके साथ रैगिंग की और मारपीट की। साथ ही, उसने एक प्रोफेसर पर बदसलूकी और यौन उत्पीड़न का आरोप भी लगाया था। इस प्रताड़ना के बाद पल्लवी गहरे डिप्रेशन में चली गई और उसकी तबीयत बिगड़ने लगी। उसे ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखना पड़ा और अंततः 26 दिसंबर को लुधियाना के अस्पताल में उसने दम तोड़ दिया।
दूसरी ओर, आरोपी प्रोफेसर अशोक कुमार ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए कहा है कि छात्रा पिछले सत्र में उनके पास थी और वर्तमान में वह किसी अन्य विभाग के अधीन पढ़ाई कर रही थी। राज्य महिला आयोग ने भी इस संवेदनशील मामले में एसपी कांगड़ा से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।