तीर्थराज प्रयाग में आज, 3 जनवरी 2026 से पतित पावनी गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के पावन संगम तट पर वार्षिक ‘माघ मेला’ का आध्यात्मिक शुभारंभ हो गया है। कड़कड़ाती ठंड और कोहरे की चादर के बीच भोर से ही “हर-हर गंगे” के जयघोष के साथ लाखों श्रद्धालुओं ने संगम के शीतल जल में आस्था की डुबकी लगाई। प्रशासन के ताजा आंकड़ों के अनुसार, पहले स्नान पर्व ‘पौष पूर्णिमा’ पर सुबह 10 बजे तक ही लगभग 9 लाख श्रद्धालु स्नान कर चुके थे, जबकि शाम तक यह संख्या 25 लाख के आंकड़े को पार कर सकती है।
पौष पूर्णिमा के इस स्नान के साथ ही संगम की रेती पर एक महीने का कठिन ‘कल्पवास’ भी विधिवत रूप से प्रारंभ हो गया है। देश के कोने-कोने से आए हजारों कल्पवासी अब अगले एक माह तक संगम तट पर बने अस्थायी तंबुओं के शहर में रहकर सात्विक जीवन, स्वाध्याय और प्रभु की साधना में लीन रहेंगे। इस वर्ष माघ मेले का आयोजन लगभग 800 हेक्टेयर के विशाल क्षेत्रफल में किया गया है, जिसे व्यवस्थित प्रबंधन के लिए 7 अलग-अलग सेक्टरों में विभाजित किया गया है। उत्तर प्रदेश सरकार ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए इस बार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से लैस सीसीटीवी कैमरों और हाई-टेक ड्रोन का उपयोग किया है, वहीं नदी में किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पहली बार ‘रिवर एम्बुलेंस’ तैनात की गई है।
ज्योतिषीय दृष्टि से भी इस बार का माघ मेला अत्यंत फलदायी माना जा रहा है। पौष पूर्णिमा पर चंद्रमा और गुरु की युति से बन रहे शुभ ‘गजकेसरी योग’ के बीच स्नान और दान का विशेष महत्व बताया जा रहा है। आगामी 15 फरवरी यानी महाशिवरात्रि तक चलने वाले इस 44 दिवसीय मेले में कुल छह प्रमुख स्नान पर्व होंगे, जिनमें मकर संक्रांति और मौनी अमावस्या पर करोड़ों की भीड़ जुटने की संभावना है। प्रशासन ने श्रद्धालुओं के सुगम आवागमन के लिए शहर में विशेष ट्रैफिक प्लान लागू किया है और संगम क्षेत्र को पूरी तरह से प्रदूषण मुक्त रखने का संकल्प लिया है।