भोपाल की 16.62 एकड़ जमीन पर सैफ अली खान का हक बरकरार

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में ‘नवाबी रियासत’ की जमीन को लेकर पिछले 25 वर्षों से चला आ रहा कानूनी विवाद आखिरकार समाप्त हो गया है। भोपाल की जिला अदालत ने फिल्म अभिनेता सैफ अली खान, शर्मिला टैगोर, सबा अली और सोहा अली खान के पक्ष में फैसला सुनाते हुए करोड़ों रुपये की 16.62 एकड़ भूमि पर उनके मालिकाना हक को वैध माना है।

क्या था पूरा विवाद?

मामला हुजूर तहसील के नयापुरा क्षेत्र स्थित बेशकीमती जमीन से जुड़ा है। नवाब मंसूर अली खान पटौदी के वारिसों ने पारिवारिक बंटवारे के बाद इस जमीन का एक हिस्सा एक बिल्डर को बेच दिया था। इस सौदे को चुनौती देते हुए अकील अहमद, परवेज अहमद और शकील अहमद ने अदालत में दावा पेश किया था। वादियों का तर्क था कि उनके पूर्वज नवाबी काल में ‘किलेदार’ थे और 1936 में तत्कालीन नवाब हमीदुल्लाह खान ने उनकी सेवाओं से खुश होकर यह जमीन उन्हें दान में दी थी।

अदालत ने खारिज किए वादियों के तर्क

14वें अपर सत्र न्यायाधीश संजय अग्रवाल की अदालत ने वादी पक्ष के दावों को सिरे से खारिज कर दिया। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि वादी पक्ष ‘दान’ से संबंधित कोई भी ठोस या कानूनी दस्तावेज पेश करने में पूरी तरह विफल रहा। केवल मौखिक दावों के आधार पर राजस्व रिकॉर्ड को चुनौती नहीं दी जा सकती।

फैसले के तीन प्रमुख आधार

अदालत ने याचिका निरस्त करने के पीछे तीन मुख्य कारण बताए:

  1. साक्ष्यों की कमी: 1936 में जमीन दान दिए जाने का कोई लिखित प्रमाण या ‘गिफ्ट डीड’ मौजूद नहीं थी।
  2. देरी से याचिका: वादियों ने निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के करीब 19 महीने बाद अदालत का दरवाजा खटखटाया, जिसे कानूनन स्वीकार्य नहीं माना गया।
  3. राजस्व रिकॉर्ड: सरकारी दस्तावेजों और राजस्व अभिलेखों में यह भूमि स्पष्ट रूप से सैफ अली खान और पटौदी परिवार के अन्य सदस्यों के नाम पर दर्ज पाई गई।

25 साल बाद मिली राहत

इस फैसले के साथ ही पटौदी परिवार को बड़ी राहत मिली है। पिछले ढाई दशक से चल रहे इस मुकदमे के कारण जमीन के विकास और हस्तांतरण पर कानूनी अड़चनें बनी हुई थीं। अदालत के इस निर्णय ने साफ कर दिया है कि भोपाल की इस रियासती संपत्ति के असली हकदार पटौदी परिवार के वारिस ही हैं।