चंडीगढ़ साइबर सेल ने एक बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए ‘डिजिटल अरेस्ट’ के जरिए ठगी करने वाले एक शातिर गिरोह के 6 सदस्यों को गिरफ्तार किया है। इस गिरोह ने खुद को सीबीआई (CBI) और मुंबई पुलिस का अधिकारी बताकर शहर के एक दंपती को मनी लॉन्ड्रिंग के झूठे मामले में फंसाने की धमकी दी और उनसे 38 लाख रुपए ठग लिए। पकड़े गए आरोपियों के तार चेन्नई और चीन से जुड़े पाए गए हैं।
वर्दी पहनकर वीडियो कॉल और फर्जी अरेस्ट वारंट का खेल
ठगी के शिकार रायपुर खुर्द निवासी कृष्ण चंद ने पुलिस को बताया कि 7 जनवरी को उनके पास एक कॉल आई, जिसमें फोन करने वाले ने खुद को मुंबई के कोलाबा पुलिस स्टेशन का अधिकारी बताया। ठगों ने पीड़ित को डराने के लिए पुलिस की वर्दी पहनकर वॉट्सऐप वीडियो कॉल की। वीडियो कॉल के दौरान पीछे का बैकग्राउंड बिल्कुल असली पुलिस स्टेशन जैसा लग रहा था। आरोपियों ने पीड़ित और उनकी पत्नी पिंकी को फर्जी गिरफ्तारी वारंट दिखाकर धमकी दी कि उनके आधार कार्ड का इस्तेमाल अवैध वित्तीय लेनदेन में हुआ है और उन्हें कभी भी गिरफ्तार किया जा सकता है। करीब 24 घंटे तक डिजिटल निगरानी (डिजिटल अरेस्ट) में रखकर दंपती को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया, जिसके दबाव में आकर पीड़ित ने अपने खाते से 38 लाख रुपए आरोपियों के बताए बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए।
चेन्नई से चीन तक फैला है नेटवर्क
साइबर सेल की एसपी गीतांजली ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि इस पूरे नेटवर्क का संचालन चेन्नई से हो रहा था। डीएसपी वेंकटेश और इंस्पेक्टर इरम रिजवी की टीम ने तकनीकी जांच के बाद चेन्नई में छापेमारी कर मुख्य आरोपी फजल रॉकी को गिरफ्तार किया। जांच में सामने आया कि फजल टेलीग्राम के जरिए चीनी नागरिकों और अन्य विदेशी संपर्कों से जुड़ा हुआ था। यह गिरोह ठगी की रकम को पहले भारतीय बैंक खातों में जमा करवाता था और फिर उसे चेक के जरिए निकालकर क्रिप्टोकरेंसी (USDT) में बदल देता था, ताकि पैसे के लेन-देन का पता न लगाया जा सके।
चेक और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग
पुलिस जांच के अनुसार, गिरोह के सदस्य हर ट्रांजैक्शन पर कमीशन लेते थे। मामले की शुरुआत तब हुई जब 8 जनवरी को फाजिल्का निवासी वीना रानी ने चंडीगढ़ के एक बैंक से चेक के जरिए 4.50 लाख रुपए निकाले। तकनीकी सर्विलांस के आधार पर पुलिस ने सबसे पहले वीना रानी को गिरफ्तार किया। उसकी निशानदेही पर सेक्टर-45 और बुड़ैल से सतनाम सिंह, सुखदीप सिंह, धर्मिंदर सिंह और मुकेश उर्फ प्रिंस को दबोचा गया। आरोपी मुकेश इस गिरोह के लिए ठगी के पैसों को क्रिप्टो में बदलने का काम संभालता था।
बड़ी रकम होल्ड कराने में मिली सफलता
पुलिस ने आरोपियों के पास से भारी मात्रा में मोबाइल फोन, लैपटॉप, बैंक पासबुक, चेकबुक, एटीएम कार्ड और गहने बरामद किए हैं। राहत की बात यह रही कि साइबर सेल ने समय रहते बैंक और गृह मंत्रालय के समन्वय से पीड़ित की एक बड़ी धनराशि को खातों में ही होल्ड (फ्रीज) करवा दिया है। गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता 2023 की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।