भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में नेतृत्व परिवर्तन का महत्वपूर्ण दौर शुरू हो चुका है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए चुनाव प्रक्रिया 19 जनवरी से शुरू होगी और 20 जनवरी को नए अध्यक्ष के नाम की औपचारिक घोषणा होने की संभावना है।
वर्तमान राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन (45 वर्ष) के निर्विरोध चुने जाने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है। यदि ऐसा होता है, तो वे बीजेपी के इतिहास में सबसे युवा पूर्णकालिक राष्ट्रीय अध्यक्ष बन जाएंगे। उनका कार्यकाल जनवरी 2026 से जनवरी 2029 तक रहेगा।
नितिन नबीन बिहार के बांकीपुर से पांच बार के विधायक और पूर्व मंत्री हैं। वे दिवंगत वरिष्ठ भाजपा नेता नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा के पुत्र हैं। आरएसएस पृष्ठभूमि से आने वाले नबीन को संगठन में गहरी समझ और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में पार्टी की सफलता के लिए जाना जाता है। दिसंबर 2025 से वे पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
बीजेपी के राष्ट्रीय चुनाव अधिकारी डॉ. के. लक्ष्मण ने चुनाव कार्यक्रम की घोषणा कर दी है। इसके अनुसार:
- 19 जनवरी: दोपहर 2 बजे से शाम 4 बजे तक नामांकन दाखिल किए जाएंगे।
- उसी दिन शाम को नामांकन पत्रों की जांच और वापसी का समय।
- 20 जनवरी: यदि आवश्यक हुआ तो मतदान होगा, अन्यथा निर्विरोध चुनाव की घोषणा की जाएगी।
नितिन नबीन के नामांकन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह जैसे शीर्ष नेता प्रस्तावक के रूप में शामिल होने की संभावना है। पार्टी मुख्यालय में होने वाली इस प्रक्रिया में बीजेपी शासित राज्यों के मुख्यमंत्री, प्रदेश अध्यक्ष और राष्ट्रीय पदाधिकारी मौजूद रहेंगे।
एक खास बात यह है कि पार्टी के वरिष्ठ नेता और संस्थापक सदस्य लालकृष्ण आडवाणी तथा मुरली मनोहर जोशी पहली बार इस चुनाव में मतदान नहीं कर पाएंगे। यह किसी राजनीतिक मतभेद के कारण नहीं, बल्कि तकनीकी वजह से है। पार्टी संविधान के अनुसार राष्ट्रीय परिषद सदस्य बनने के लिए संबंधित राज्य में संगठनात्मक चुनाव पूरे होना जरूरी है। दोनों नेता दिल्ली से राष्ट्रीय परिषद सदस्य हैं, लेकिन दिल्ली प्रदेश भाजपा में मंडल, जिला और प्रदेश स्तर के चुनाव अभी लंबित हैं। इसी कारण उनका नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं हो सका।
जेपी नड्डा के स्थान पर नितिन नबीन के सामने सबसे बड़ी जिम्मेदारी 2029 के लोकसभा चुनाव के लिए संगठन को मजबूत करने की होगी। साथ ही आगामी विधानसभा चुनावों में पार्टी का प्रदर्शन बेहतर करना भी चुनौती रहेगा। पार्टी अब युवा नेतृत्व पर जोर देकर अगली पीढ़ी की टीम तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।