कल यानी 1 फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण संसद में पूर्ण बजट पेश करेंगी। चुनाव के बाद यह एक महत्वपूर्ण बजट होगा, जिसमें सरकार का पूरा ध्यान खपत (Consumption) बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने पर रह सकता है। विशेषज्ञों और उद्योग जगत के संकेतों के आधार पर इस बार 5 क्षेत्रों में बड़ी घोषणाएं होने की प्रबल संभावना है।
टैक्स में राहत और ‘परचेजिंग पावर’ पर जोर
मिडिल क्लास को बड़ी राहत देते हुए सरकार नई टैक्स रिजीम के तहत स्टैंडर्ड डिडक्शन को ₹75,000 से बढ़ाकर ₹1,00,000 कर सकती है। यदि ऐसा होता है, तो ₹13 लाख तक की सालाना आय वाले लोगों को कोई टैक्स नहीं देना होगा (फिलहाल यह सीमा ₹12.75 लाख है)। इसका मुख्य उद्देश्य लोगों के हाथ में अधिक पैसा छोड़ना है ताकि बाजार में खरीदारी बढ़े और आर्थिक पहिया तेजी से घूमे।
किसानों के लिए सम्मान निधि में 50% का इजाफा
पीएम-किसान सम्मान निधि की राशि जो पिछले तीन साल से ₹6,000 पर स्थिर है, उसे बढ़ाकर ₹9,000 सालाना किया जा सकता है। महंगाई और खेती की बढ़ती लागत को देखते हुए किसान संगठन लंबे समय से इसे ₹12,000 करने की मांग कर रहे थे। इस घोषणा से देश के करीब 11 करोड़ किसान परिवारों को लाभ होगा और सरकार पर सालाना करीब ₹95,000 करोड़ का वित्तीय बोझ आएगा।
वेटिंग लिस्ट खत्म करने के लिए 300+ नई ट्रेनें
रेलवे सेक्टर में सरकार ‘जीरो वेटिंग लिस्ट’ के लक्ष्य पर काम कर रही है। इसके लिए बजट में 300 से अधिक नई वंदे भारत और अमृत भारत ट्रेनों का ऐलान हो सकता है। सरकार का विजन 2030 तक हर यात्री को कंफर्म सीट उपलब्ध कराना है। पिछले साल के ₹2.65 लाख करोड़ के ऐतिहासिक रेल बजट के मुकाबले इस बार फंड और अधिक बढ़ने की उम्मीद है।
सोलर पैनल पर सब्सिडी में ₹20,000 की अतिरिक्त बचत
‘पीएम सूर्य घर योजना’ को गति देने के लिए 2 किलोवाट (KW) तक के सोलर सिस्टम पर सब्सिडी बढ़ाई जा सकती है। वर्तमान में ₹30,000 प्रति किलोवाट मिलने वाली सब्सिडी को बढ़ाकर ₹40,000 किया जा सकता है। इससे 2 किलोवाट का पैनल लगवाने वाले परिवारों को कुल ₹80,000 की सब्सिडी मिलेगी, जिससे उनका शुरुआती निवेश काफी कम हो जाएगा और मुफ्त बिजली का लक्ष्य तेजी से पूरा होगा।
60 वर्ष के बुजुर्गों को भी सुरक्षा कवच
स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के तहत आयुष्मान भारत योजना (PM-JAY) की पात्रता आयु 70 वर्ष से घटाकर 60 वर्ष की जा सकती है। आंकड़ों के अनुसार, 60 से 70 वर्ष के 82% बुजुर्गों के पास कोई इंश्योरेंस नहीं है। इसके साथ ही, कैंसर और हार्ट जैसी गंभीर बीमारियों को देखते हुए ₹5 लाख की इलाज सीमा में भी बढ़ोतरी की घोषणा संभव है ताकि परिवारों को इलाज के लिए कर्ज न लेना पड़े।