कंगना का ‘हिमाचली स्वैग’: संसद पहुंचीं कुल्लू कारीगरों का हस्तनिर्मित कोट पहनकर

मंडी से बीजेपी सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत ने गुरुवार को संसद भवन में एक खास हिमाचली कोट पहनकर सभी का ध्यान खींचा। यह ‘हिमाचली समकालीन कोट’ कुल्लू घाटी की महिला कारीगरों द्वारा हाथ से बुना गया है, जो पारंपरिक हस्तकला और समकालीन डिजाइन का सुंदर मिश्रण है।

इस कोट को कुल्लू की छह महिला बुनकरों पुष्पा ठाकुर, इंद्रा देवी, मनीषा ठाकुर, वंदना, पूनम सूद और मीना सूद ने करीब दो महीने की मेहनत से तैयार किया। पूरी तरह देसी गद्दी ऊन से निर्मित यह परिधान प्राकृतिक रंगों और पारंपरिक बुनाई तकनीक से बनाया गया है, जिसकी अनुमानित कीमत 45 हजार रुपये है।

कोट के रंग हिमालय की प्राकृतिक सुंदरता से प्रेरित हैं नीला आकाश और झीलों की शांति, हरा चरागाहों की हरियाली, तथा अखरोट जैसा भूरा रंग बर्फीली चोटियों की गरिमा को दर्शाता है। यह न केवल एक फैशनेबल परिधान है, बल्कि हिमाचल प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत और पर्यावरण-अनुकूल शिल्पकला का जीवंत प्रतीक भी है।

‘कुल्वी व्हिम्स’ संस्था के संस्थापक भृगु राज आचार्य (नग्गर, कुल्लू निवासी) और निशा सुब्रमण्यम ने बताया कि यह कोट गद्दी ऊन की पारंपरिक विरासत को जीवित रखने और ग्रामीण महिलाओं को रोजगार देने के उनके प्रयासों का हिस्सा है। संस्था स्थानीय संसाधनों का उपयोग कर हस्तशिल्प को आधुनिक बाजार से जोड़ने का काम कर रही है।

कंगना द्वारा संसद जैसे राष्ट्रीय मंच पर इस कोट को अपनाना महिला कारीगरों के लिए बेहद गर्व का क्षण साबित हुआ है। वे इसे अपनी कला और मेहनत को सम्मान मिलने के रूप में देख रही हैं। संस्था के अनुसार, यह कदम ‘वोकल फॉर लोकल’ और आत्मनिर्भर भारत के अभियान को भी मजबूती प्रदान करता है, जिससे हिमाचली हस्तशिल्प को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिल सकती है।