भारत पर टैरिफ की धमकी, अमेरिका खुद रूस से डीजल खरीदेगा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घरेलू डीजल कीमतों को काबू में करने के लिए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से सीधी बातचीत कर एक महत्वपूर्ण ऊर्जा समझौता किया है। नवंबर में होने वाले अमेरिकी मिडटर्म चुनावों से पहले यह कदम उठाया गया है, जब देश में डीजल की कीमतें ऊंचे स्तर पर पहुंच गई हैं।

ट्रंप के अनुसार, रूस तुरंत अमेरिकी और विश्व बाजार में तीन लाख टन से अधिक डीजल भेजेगा। नवंबर में अतिरिक्त पांच लाख टन और उसके बाद और ज्यादा आपूर्ति का प्रावधान है। अमेरिकी वित्त विभाग ने रूसी डीजल निर्यात पर लगी पाबंदियों को अप्रैल 2027 तक अस्थायी रूप से हटा दिया है। ट्रंप का दावा है कि इससे किसानों, ट्रक चालकों और आम नागरिकों के लिए ईंधन सस्ता होगा।

भारत के लिए चिंता का विषय

अमेरिका ने हाल ही में एक कानून पारित कर राष्ट्रपति को रूस से तेल या गैस खरीदने वाले प्रमुख देशों पर सौ प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार दे दिया है। भारत और चीन जैसे बड़े खरीदार इस प्रावधान के दायरे में आ सकते हैं। पहले भी भारत पर रूसी कच्चे तेल की खरीद को लेकर अतिरिक्त शुल्क लगाया जा चुका है।

आलोचकों का कहना है कि जब भारत सस्ता रूसी तेल खरीदता है तो उसे दंड का सामना करना पड़ता है, लेकिन अमेरिका की घरेलू जरूरत पड़ने पर वही स्रोत स्वीकार्य हो जाता है। भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा और महंगाई नियंत्रण के लिए रूसी तेल पर निर्भर रहा है।

यूक्रेन की तीखी प्रतिक्रिया

यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने इस समझौते की कड़ी निंदा की है। उन्होंने इसे युद्ध को और लंबा खींचने वाला कदम बताया। उनके अनुसार, रूस को डीजल बेचने की अनुमति देने से उसे युद्ध जारी रखने के लिए अतिरिक्त धन मिलेगा। जेलेंस्की ने इसे “पुतिन के लिए उपहार” करार देते हुए कहा कि यह पैसा यूक्रेन के खिलाफ संघर्ष में इस्तेमाल होगा। उन्होंने अमेरिकी निर्णय को साझेदार देशों के बीच अनुचित व्यवहार भी बताया।