PM मोदी का बड़ा बयान: भारत ने दुनिया को सस्ती दवाएं-टैलेंट दिया, बदले में क्रेडिट-रॉयल्टी भी नहीं ली!

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को राजधानी में हो रहे ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम के मंच से भारत की वैश्विक भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि दुनिया जब सस्ती दवाओं की तलाश करती है तो हर पांच जेनेरिक दवाओं में से एक भारत से आती है। टैलेंट की जरूरत पड़ने पर भारत के प्रशिक्षित युवाओं पर भरोसा जताया जाता है। देश में इस समय दो हजार से अधिक ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर सक्रिय हैं, जो अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को सेवाएं उपलब्ध करा रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत अपनी उपलब्धियों का श्रेय या रॉयल्टी नहीं मांगता। उन्होंने याद दिलाया कि दुनिया को ‘शून्य’ की अवधारणा भारत ने दी, जिससे पूरी मानवता को लाभ हुआ, लेकिन उसके बदले कभी कोई रॉयल्टी नहीं ली गई। आज भी भारत उसी भाव से काम कर रहा है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि भारत किसी की कीमत पर आगे नहीं बढ़ता। देश दुनिया के साथ मिलकर और दुनिया के हित में तरक्की करता है।

यह अंतरराष्ट्रीय मंच पहली बार भारत में आयोजित हो रहा है। 13 से 15 अक्टूबर तक चलने वाले इस तीन दिवसीय कार्यक्रम की थीम है “ए वर्ल्ड इन प्ले: डिफाइनिंग द न्यू लीवर्स ऑफ पावर”। इसमें दुनिया भर के पांच सौ से अधिक नीति निर्माता, उद्योगपति और निवेशक शामिल हो रहे हैं। प्रधानमंत्री ने ब्लूमबर्ग टीम को बधाई देते हुए कहा कि उन्होंने सही समय और सही स्थान का चुनाव किया है।

अपने संबोधन में पीएम मोदी ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की मौजूदा चुनौतियों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सप्लाई चेन, ऊर्जा संसाधन, महत्वपूर्ण खनिज और तकनीक अब दबाव बनाने के साधन बनते जा रहे हैं। वैश्वीकरण के पुराने रास्ते अब बाधाओं में बदल गए हैं। ऐसे माहौल में भरोसा सबसे बड़ी जरूरत बन गया है। भारत इस स्थिति में स्थिरता और विश्वसनीयता का विकल्प पेश करता है।

प्रधानमंत्री ने ‘पावर टू एंपावर’ की अवधारणा पर जोर देते हुए बताया कि इक्कीसवीं सदी में डेटा, ज्ञान और नवाचार असली ताकत हैं। सवाल यह है कि इनका उपयोग केवल कुछ लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए होगा या करोड़ों लोगों के लिए नए मौके पैदा करेगा। उन्होंने भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, स्टार्टअप क्षेत्र (जहां संख्या अब ढाई लाख से अधिक हो गई है) और समावेशी विकास मॉडल का जिक्र किया।

आर्थिक मोर्चे पर उन्होंने अप्रैल-जून तिमाही में 7.8 प्रतिशत की वृद्धि दर, सात सौ अरब डॉलर से अधिक के विदेशी मुद्रा भंडार और निरंतर सुधारों का उल्लेख करते हुए कहा कि अनिश्चितताओं भरी दुनिया में भारत भरोसेमंद और स्थिर साझेदार के रूप में खड़ा है।