मास्टर प्लान-2047 के मसौदे पर आपत्ति दर्ज कराने की प्रक्रिया तेज हो गई है। किसानों से पहले व्यापारी शुक्रवार सुबह टीएंडसीपी कार्यालय पहुंचे। उन्होंने भूमि उपयोग परिवर्तन (कन्वर्जन) शुल्क को 5 प्रतिशत तक सीमित रखने और चल रही सीलिंग कार्रवाई तुरंत रोकने की मांग की।
व्यापारियों का कहना है कि मिक्स्ड लैंड यूज के प्रावधानों के बावजूद डायवर्जन शुल्क अधिक होने से छोटे और मध्यम व्यापारियों पर बोझ बढ़ेगा। वे चाहते हैं कि फीस कम रखी जाए और आवासीय इलाकों में संचालित प्रतिष्ठानों पर सीलिंग बंद हो, ताकि व्यापार को राहत मिले।
किसान संगठन भी सक्रिय हैं। भारतीय किसान संघ के तहत आसपास के दर्जनों गांवों के किसान आज दोपहर बाद उसी कार्यालय में पहुंचकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराएंगे। उनका मुख्य विरोध कृषि भूमि को रिवरफ्रंट, हरित पट्टी, वन क्षेत्र या भोजताल संरक्षण जोन में शामिल करने से है। वे कहते हैं कि इससे खेती और आजीविका प्रभावित होगी। उनकी मांग है कि लैंड यूज कृषि ही बना रहे और बदलाव से पहले ग्राम सभाओं की राय ली जाए।
टीएंडसीपी अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि नियम के अनुसार 30 दिनों की अवधि में आपत्तियां और सुझाव स्वीकार किए जा रहे हैं। सभी पक्षों को सुनवाई के लिए बुलाया जाएगा। दावे-आपत्ति की अंतिम तारीख निकट है।
मास्टर प्लान में शहर के विस्तार, हरित क्षेत्र बढ़ाने और सड़क चौड़ाई के आधार पर व्यावसायिक गतिविधियों की अनुमति जैसे कई प्रावधान शामिल हैं। रहवासी समूह आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों के नियमितीकरण और संवेदनशील क्षेत्रों में निर्माण के विरोध में पहले ही आपत्तियां दर्ज करा चुके हैं।