दिल्ली दंगों के मामले में जेल में बंद पूर्व जेएनयू छात्र नेता और सामाजिक कार्यकर्ता उमर ख़ालिद को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बार फिर चर्चा तेज़ हो गई है। न्यूयॉर्क सिटी के नवनिर्वाचित मेयर ज़ोहरान ममदानी ने उमर ख़ालिद के नाम एक निजी नोट लिखा है, वहीं अमेरिका के कई सांसदों ने भारत सरकार से उनके मामले में निष्पक्ष और समयबद्ध न्यायिक प्रक्रिया सुनिश्चित करने की अपील की है।
जानकारी के अनुसार, ज़ोहरान ममदानी ने यह नोट उमर ख़ालिद के माता-पिता के माध्यम से भेजा। ममदानी ने अपने संदेश में उमर ख़ालिद के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि वे उनके संघर्ष और विचारों को याद करते हैं तथा उनके परिवार से मिलना उनके लिए सम्मान की बात थी। इस पत्र में उन्होंने सहानुभूति व्यक्त करते हुए यह भी कहा कि दुनिया के कई लोग उमर ख़ालिद के बारे में सोच रहे हैं। यह नोट सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी व्यापक रूप से साझा किया गया, जिससे यह मुद्दा फिर अंतरराष्ट्रीय बहस के केंद्र में आ गया।
इसी बीच, अमेरिका के आठ सांसदों ने संयुक्त रूप से भारत के राजनयिक प्रतिनिधियों को पत्र लिखकर उमर ख़ालिद के लंबे समय से चले आ रहे हिरासत के मामले पर चिंता जताई है। सांसदों ने अपने पत्र में कहा कि उमर ख़ालिद कई वर्षों से जेल में हैं, लेकिन उनके खिलाफ मुकदमे की सुनवाई अब तक पूरी नहीं हो पाई है। उन्होंने मांग की कि अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों के अनुरूप उन्हें निष्पक्ष सुनवाई और समय पर न्याय मिलना चाहिए। सांसदों का कहना है कि किसी भी लोकतंत्र में बिना ट्रायल के लंबे समय तक हिरासत न्याय के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है।
उल्लेखनीय है कि उमर ख़ालिद को वर्ष 2020 के दिल्ली दंगों के मामले में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA के तहत गिरफ्तार किया गया था। वह तब से तिहाड़ जेल में बंद हैं और उनकी जमानत याचिकाएं विभिन्न अदालतों में लंबित रही हैं। उनके समर्थक लगातार यह सवाल उठाते रहे हैं कि मामला अदालत में आगे क्यों नहीं बढ़ पा रहा है।
ज़ोहरान ममदानी का व्यक्तिगत संदेश और अमेरिकी सांसदों की अपील यह संकेत देती है कि उमर ख़ालिद का मामला अब केवल भारत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसे अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के संदर्भ में देखा जा रहा है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि इस अंतरराष्ट्रीय दबाव का भारत की न्यायिक प्रक्रिया पर कोई प्रभाव पड़ता है या नहीं।