ईरान में खामेनेई के खिलाफ बगावत: तेहरान में गोलीबारी से 217 मौतों का दावा

ईरान में दिसंबर 2025 के अंत से जारी विरोध प्रदर्शनों ने पूरे देश को हिला कर रख दिया है। शुरुआत तेहरान के ग्रैंड बाजार में मुद्रा के भारी अवमूल्यन, महंगाई और आर्थिक संकट के खिलाफ दुकानदारों की हड़ताल से हुई, जो जल्द ही पूरे देश में फैल गई। प्रदर्शनकारी अब इस्लामिक गणराज्य के पतन, आजादी, गरिमा और मानवाधिकारों की मांग कर रहे हैं। सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई ने प्रदर्शनकारियों को “विदेशी ताकतों के एजेंट” और “दंगाइयों” करार देते हुए सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है, जिसके बाद सुरक्षा बलों द्वारा गोलीबारी और हिंसक दमन बढ़ गया है।

प्रदर्शन 28 दिसंबर 2025 से शुरू होकर अब सभी 31 प्रांतों में फैल चुके हैं। लोग “डेथ टू खामेनेई” (खामेनेई मुर्दाबाद), “डेथ टू द डिक्टेटर” और “इस साल खामेनेई का अंत होगा” जैसे नारे लगा रहे हैं। कई जगहों पर पुरानी शाही झंडा (शेर और सूरज) लहराया जा रहा है, जो 1979 की क्रांति से पहले के ईरान का प्रतीक है।

मौतों का आंकड़ा और दमन की तीव्रता

मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, प्रदर्शनों में अब तक दर्जनों लोगों की मौत हो चुकी है। एमनेस्टी इंटरनेशनल और ह्यूमन राइट्स वॉच ने 31 दिसंबर 2025 से 3 जनवरी 2026 तक कम से कम 28 प्रदर्शनकारियों और राहगीरों (जिनमें बच्चे शामिल) की मौत की पुष्टि की है। ये मौतें मुख्य रूप से लोरिस्तान और इलाम प्रांतों में हुईं, जहां कुर्द और लुरी अल्पसंख्यक प्रभावित हैं।

नॉर्वे स्थित ईरान ह्यूमन राइट्स ने कम से कम 45 मौतें (जिनमें 8 बच्चे) बताई हैं। ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी (HRANA) के अनुसार, कुल 62 मौतें हुईं, जिनमें 48 प्रदर्शनकारी और 14 सुरक्षा कर्मी शामिल हैं। एक गंभीर रिपोर्ट में टाइम मैगजीन को तेहरान के एक डॉक्टर ने अनाम रूप से बताया कि राजधानी के सिर्फ छह अस्पतालों में कम से कम 217 प्रदर्शनकारियों की मौत दर्ज हुई है, ज्यादातर लाइव गोलीबारी से। यह संख्या अन्य रिपोर्टों से काफी अधिक है और हाल की हिंसा की तीव्रता को दर्शाती है।

सुरक्षा बलों (आईआरजीसी, पुलिस और बसिज) ने आंसू गैस, वाटर कैनन, मेटल पेलेट्स और लाइव फायरिंग का इस्तेमाल किया है। कई जगहों पर अस्पतालों पर छापे मारे गए, जहां घायलों को गिरफ्तार किया गया। 8 जनवरी से पूरे देश में इंटरनेट और फोन सेवाएं बंद कर दी गईं, जिसे दमन छिपाने की रणनीति माना जा रहा है। हजारों गिरफ्तारियां हुई हैं।

खामेनेई का रुख और बयान

खामेनेई ने 3 जनवरी को कहा कि “दंगाइयों को उनकी जगह दिखानी चाहिए”। 9 जनवरी को राज्य टीवी पर दिए संबोधन में उन्होंने प्रदर्शनकारियों पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को खुश करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “ये लोग अपनी सड़कें बर्बाद कर रहे हैं… अमेरिका के राष्ट्रपति को खुश करने के लिए।” खामेनेई ने ट्रंप पर “ईरानियों के खून से हाथ रंगे होने” का आरोप लगाया और एकजुटता की अपील की। दर्शकों ने “डेथ टू अमेरिका” के नारे लगाए।

उन्होंने प्रदर्शनकारियों को “विदेशी किराएदार” बताया और कहा कि ईरानी लोग इन्हें बर्दाश्त नहीं करेंगे। न्यायपालिका प्रमुख ने प्रदर्शनकारियों के लिए “कठोरतम सजा” और मौत की सजा की चेतावनी दी है।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर प्रदर्शनकारियों की हत्या जारी रही तो अमेरिका हस्तक्षेप करेगा। उन्होंने कहा, “ईरान बड़ी मुसीबत में है… अगर वे लोगों को मारना शुरू करेंगे, तो हम शामिल होंगे।” निर्वासित क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी ने लोगों से सड़कों पर उतरने और ट्रंप से मदद की अपील की।

संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीय संघ, जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन ने हिंसा की निंदा की है। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने अंतरराष्ट्रीय जांच और हिंसा रोकने की मांग की। स्थिति तेजी से बदल रही है, और इंटरनेट ब्लैकआउट के कारण सटीक जानकारी सीमित है। प्रदर्शन ईरान के शासकों के लिए अब तक की सबसे बड़ी चुनौती बन चुके हैं।