केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने E-20 पेट्रोल को लेकर उठ रहे विवादों पर सफाई दी है। उन्होंने कहा कि देश में 2004 से ही पेट्रोल में एथेनॉल मिलाया जा रहा है और अब तक इंजन या गाड़ियों को नुकसान पहुंचने का कोई प्रमाण सामने नहीं आया है।
एक बातचीत में गडकरी ने कहा कि एथेनॉल, E-20 और माइलेज को लेकर लोगों के मन में कई सवाल हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि गाड़ी का माइलेज सिर्फ ईंधन पर निर्भर नहीं करता। यह सड़क की स्थिति, ट्रैफिक और ड्राइविंग पर भी निर्भर करता है।
मंत्री ने जोर देकर कहा कि वैकल्पिक ईंधन को अपनाना देश के लिए जरूरी है। इससे तीन बड़े फायदे होंगे। पहला, भारत का 22 लाख करोड़ रुपये का पेट्रोलियम आयात घटेगा। दूसरा, प्रदूषण कम होगा। दिल्ली में होने वाले प्रदूषण में 40% योगदान परिवहन का है, जिसे कम करना प्राथमिकता है। तीसरा, एथेनॉल उत्पादन से किसानों की आय बढ़ेगी।
E-20 को लेकर यह सवाल भी उठा कि इस पर चर्चा परिवहन मंत्रालय क्यों कर रहा है, जबकि यह पेट्रोलियम मंत्रालय का विषय है। इस पर गडकरी ने कहा कि ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग और वाहनों के मानक तय करना उनके मंत्रालय का अधिकार है। हालांकि ईंधन के मिश्रण और आपूर्ति का अंतिम निर्णय पेट्रोलियम मंत्रालय ही लेता है।
उन्होंने बताया कि वह पिछले 25 साल से किसानों के हित में वैकल्पिक ईंधन पर काम कर रहे हैं। सरकार का लक्ष्य आत्मनिर्भर भारत और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देना है।