लद्दाख के पर्यावरण कार्यकर्ता और शिक्षाविद् सोनम वांगचुक ने परीक्षा घोटालों के खिलाफ जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन के बीच एक भावुक अपील की है। उन्होंने कहा कि वे 20 जुलाई तक स्वस्थ रहना चाहते हैं, क्योंकि उसी दिन कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) जंतर-मंतर से संसद भवन की ओर शांतिपूर्ण मार्च निकाल रही है।
वांगचुक 28 जून से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। CJP का यह प्रदर्शन 20 जून से शुरू हुआ था, जिसमें NEET-UG समेत अन्य परीक्षाओं में कथित पेपर लीक, अनियमितताओं और इससे जुड़ी छात्र आत्महत्याओं के मामले उठाए जा रहे हैं। आंदोलनकार शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और प्रभावित परिवारों को मुआवजे की मांग कर रहे हैं।
स्वास्थ्य स्थिति बिगड़ी, चिकित्सकों ने जताई चिंता
हड़ताल के करीब 16-17 दिन पूरे होने पर वांगचुक का वजन 8 किलो से अधिक घट चुका है। उनके ब्लड शुगर लेवल में काफी गिरावट आई है और ब्लड प्रेशर भी कम दर्ज किया गया है। चिकित्सकों के अनुसार, लंबे समय तक भोजन न लेने से शरीर की ऊर्जा समाप्त हो रही है, जिससे हृदय, किडनी और लीवर जैसे अंगों के फेलियर का खतरा बढ़ गया है। अगले कुछ दिन बेहद नाजुक बताए जा रहे हैं।
वांगचुक ने खुद अपनी स्थिति पर कहा है कि शुरुआती मुश्किलें तो हैं, लेकिन वे अभी भी मानसिक रूप से मजबूत हैं। समर्थकों की अनशन छोड़ने की अपीलों पर उन्होंने जवाब दिया कि यह मुद्दा सिर्फ उनका नहीं, बल्कि हजारों छात्रों के भविष्य और लद्दाख की सुरक्षा से जुड़ा है।
20 जुलाई को बड़ा मार्च
वांगचुक ने सोशल मीडिया पर देशवासियों से सीधा संदेश दिया- “आरामदेह घर बैठकर समर्थन देने के बजाय दिल्ली आएं और 20 जुलाई को मार्च में शामिल हों।” यह मार्च संसद के मानसून सत्र के पहले दिन होगा, जिसके जरिए सांसदों तक छात्रों की पीड़ा पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।
CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने बताया कि मार्च पूरी तरह शांतिपूर्ण होगा और इसमें विपक्षी दलों के कई नेता भी शामिल हो सकते हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार अब तक कोई बातचीत शुरू करने को तैयार नहीं हुई, इसलिए संसद तक आवाज ले जाना जरूरी हो गया है।