भारत ने रचा नया इतिहास: स्काईरूट का विक्रम-1 रॉकेट सफलतापूर्वक पहुंचा ऑर्बिट में

हैदराबाद की स्पेस स्टार्टअप स्काईरूट एयरोस्पेस ने आज देश का पहला स्वदेशी निजी ऑर्बिटल रॉकेट लॉन्च कर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। विक्रम-1 रॉकेट ने ‘मिशन आगमन’ के तहत श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से उड़ान भरी और अपने पेलोड्स को निर्धारित कक्षा में स्थापित कर दिया।

लॉन्च दोपहर करीब 12 बजे हुआ। लगभग 16 मिनट की उड़ान के बाद रॉकेट ने 450 किलोमीटर की ऊंचाई वाली निम्न पृथ्वी कक्षा (LEO) में पहुंचकर मिशन को सफल बना दिया। इस सफलता के साथ भारत अब उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है जहां निजी कंपनियां ऑर्बिट तक रॉकेट भेज सकती हैं।

रॉकेट की खासियतें

विक्रम-1 पूरी तरह कार्बन कंपोजिट से बना हल्का लेकिन मजबूत रॉकेट है। इसमें स्वदेशी प्रोपल्शन सिस्टम, 3डी प्रिंटेड इंजन और मल्टी-स्टेज टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है। यह छोटे सैटेलाइट्स (350 किलोग्राम तक) को आसानी से कक्षा में पहुंचा सकता है।

इस पहले टेस्ट फ्लाइट में भारतीय और विदेशी पेलोड्स सवार थे, जिनमें वैज्ञानिक उपकरण, पृथ्वी 관察 कैमरा और स्पेस डेब्री हटाने वाली तकनीक जैसी चीजें शामिल हैं।

कंपनी का सफर

स्काईरूट एयरोस्पेस की शुरुआत 2018 में दो पूर्व इसरो वैज्ञानिकों पवन कुमार चंदना और नागा भारथ डाका ने की थी। दोनों ने सरकारी नौकरी छोड़कर अपना स्टार्टअप शुरू किया और तेजी से आगे बढ़े। साल 2022 में कंपनी ने विक्रम-S सब-ऑर्बिटल रॉकेट लॉन्च कर पहले ही निजी क्षेत्र में कीर्तिमान स्थापित किया था।

अभी हाल में कंपनी ने बड़ी फंडिंग हासिल कर यूनिकॉर्न का दर्जा प्राप्त किया है। इसका मकसद छोटे सैटेलाइट मालिकों के लिए सस्ता, तेज और ऑन-डिमांड लॉन्च सेवा उपलब्ध कराना है।

देश के लिए मील का पत्थर

यह लॉन्च भारत के निजी स्पेस सेक्टर के लिए गेम चेंजर साबित होगा। इससे न सिर्फ लागत कम होगी बल्कि युवा इंजीनियरों और स्टार्टअप्स को नई प्रेरणा मिलेगी। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह कदम देश की स्पेस इकोनॉमी को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य प्रमुख हस्तियों ने इस उपलब्धि पर स्काईरूट टीम को बधाई दी है।