सीधी संदीपनी कन्या स्कूल: जर्जर भवन में 1600 छात्राएं, टपक रही छत

मध्य प्रदेश के सीधी जिले में स्थित संदीपनी कन्या स्कूल (शासकीय कन्या उच्च माध्यमिक विद्यालय) में शिक्षा ले रही छात्राओं की मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं। पुरानी और जर्जर इमारत में करीब 1600 छात्राएं रोजाना क्लास अटेंड कर रही हैं, जबकि भवन की क्षमता इससे 430 छात्राओं कम है। बारिश के मौसम में छत से पानी टपकने की समस्या आम हो गई है, जिससे कक्षाओं में पढ़ाई बाधित हो रही है और छात्राओं की सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं।

स्कूल की इमारत लंबे समय से मरम्मत की मांग कर रही है। दीवारों में दरारें, छत का कमजोर होना और प्लास्टर के गिरने जैसी समस्याएं यहां रोजमर्रा की बात बन गई हैं। बढ़ती छात्र संख्या के कारण कक्षाएं भीड़भाड़ वाली हो गई हैं। अभिभावक बताते हैं कि मानसून में बच्चियों को किताबें संभालते हुए क्लास चलानी पड़ती है, जिसका सीधा असर उनकी पढ़ाई पर पड़ रहा है।

छात्राओं की आवाज

स्थानीय छात्राओं का कहना है कि वे डर के माहौल में पढ़ाई करती हैं। एक छात्रा ने बताया, “जब बारिश होती है तो छत से पानी गिरता है। फर्श गीला हो जाता है और हमें इधर-उधर बैठना पड़ता है। कभी-कभी क्लास भी बंद करनी पड़ जाती है।” स्कूल प्रबंधन ने भी कई बार ऊपरी अधिकारियों को इसकी सूचना दी है, लेकिन स्थायी समाधान अभी तक नहीं निकला।

संदीपनी योजना की चुनौतियां

प्रदेश सरकार की संदीपनी विद्यालय योजना (पूर्व में सीएम राइज स्कूल) का मकसद आधुनिक सुविधाओं के साथ बेहतर शिक्षा प्रदान करना है। हालांकि, कई जिलों में नई इमारतों का निर्माण देरी से हो रहा है या अधर में लटका हुआ है। सीधी का यह मामला भी उसी श्रेणी में आता है, जहां पुरानी इमारत पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।

शिक्षा विभाग के सूत्रों का कहना है कि भवन की मरम्मत और विस्तार के प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है। स्थानीय प्रशासन से मांग की जा रही है कि जल्द से जल्द या तो पुरानी इमारत की मजबूत मरम्मत कराई जाए या नई बिल्डिंग का निर्माण शुरू किया जाए, ताकि छात्राओं को सुरक्षित और अनुकूल वातावरण मिल सके।

अभिभावकों और स्थानीयों की चिंता

अभिभावक और स्थानीय नागरिक इस स्थिति से काफी नाराज हैं। उन्होंने कहा कि लड़कियों की शिक्षा को प्राथमिकता देने वाले क्षेत्र में ऐसी लापरवाही स्वीकार्य नहीं है। वे शीघ्र हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं।