नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने मंगलवार को बड़ा फैसला सुनाया। चुनिंदा पर्सन-टू-मर्चेंट UPI लेनदेन पर प्रस्तावित 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) अब दिवाली के तुरंत बाद ही लागू होगा। पहले यह शुल्क 15 अक्टूबर 2026 से शुरू होना तय था।
UPI एंड सर्विसेज स्टीयरिंग कमेटी ने त्योहारी सीजन को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया। नई लागू तिथि की घोषणा बाद में अलग से की जाएगी।
पहले का प्रावधान?
सितंबर में जारी फ्रेमवर्क के अनुसार:
- ₹2,000 से अधिक मूल्य वाले चुनिंदा मर्चेंट UPI भुगतान पर 0.4% MDR लगता।
- ₹75,000 या उससे बड़े लेनदेन पर अधिकतम सीमा ₹300 रखी गई थी।
- रेलवे, टेलीकॉम, बीमा और ईंधन जैसे क्षेत्रों में ₹2,000 से ऊपर फ्लैट ₹5 शुल्क लागू होता।
- व्यक्ति-से-व्यक्ति (P2P) ट्रांसफर पूरी तरह मुफ्त रहते।
- ₹2,000 तक के मर्चेंट भुगतान और छोटे व्यापारियों (मासिक UPI कमाई ₹1 लाख तक) पर कोई शुल्क नहीं लगता।
- कुल मर्चेंट ट्रांजैक्शन वॉल्यूम का 95 प्रतिशत से अधिक हिस्सा शुल्क-मुक्त रहता।
स्थगन का कारण
दशहरा-दिवाली जैसे त्योहारों में खरीदारी का चरम होता है। व्यापारियों और मर्चेंट संगठनों ने इस दौरान राहत की मांग की थी। NPCI ने त्योहारी मौसम को ध्यान में रखते हुए लागू करने की तारीख आगे बढ़ा दी। इससे व्यापारियों और पेमेंट सेवा प्रदाताओं को सिस्टम तैयार करने के लिए अतिरिक्त समय मिल गया।व्यापारी संघों ने इस निर्णय का स्वागत किया है। उन्होंने इसे त्योहारी और शादी के सीजन के लिहाज से सही बताया।