गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार निवेशकों के लिए निराशाजनक रहा। बेंचमार्क इंडेक्स निचले स्तर पर खुले और पूरे दिन बिकवाली का दबाव बना रहा। नतीजतन सेंसेक्स 73,100 और निफ्टी 22,600 के अहम स्तरों से नीचे आ गया।
बाजार में व्यापक कमजोरी दिखी। इसके मुख्य कारण वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेत, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और घरेलू बॉन्ड यील्ड में हुई तेज बढ़ोतरी रहे। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी करीब 1.3 प्रतिशत तक की गिरावट आई, जिससे निवेशकों की चिंता और बढ़ गई।
निफ्टी के 50 में से 47 शेयर लाल निशान में बंद हुए। पावरग्रिड, नेस्ले इंडिया, कोल इंडिया और हिंडाल्को जैसे शेयरों में 2 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई और ये सबसे ज्यादा लुढ़कने वाले शेयर रहे। वहीं एटरनल और एक्सिस बैंक के शेयरों में हल्की बढ़त दिखी।
सेक्टर के लिहाज से मेटल, एफएमसीजी और ऑटो सबसे ज्यादा प्रभावित रहे। निफ्टी मेटल, ऑटो और एफएमसीजी इंडेक्स में 1 से 2 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आई। बाजार में अनिश्चितता बढ़ने का संकेत देते हुए इंडिया वीआईएक्स 5.3 प्रतिशत चढ़कर लगभग 16.50 के स्तर पर पहुंच गया।
कच्चे तेल की ऊंची कीमतें बाजार के लिए बड़ा दबाव बनीं। डब्ल्यूटीआई क्रूड करीब 98 डॉलर प्रति बैरल पर जबकि ब्रेंट क्रूड 110 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर कारोबार कर रहा था। साथ ही भारत के 10 वर्षीय सरकारी बॉन्ड की यील्ड 7.43 प्रतिशत पर पहुंच गई, जो 2023 के बाद का सर्वोच्च स्तर है। ऊंची बॉन्ड यील्ड इक्विटी बाजारों के लिए नकारात्मक मानी जाती है।
एशियाई बाजारों से भी कमजोर संकेत मिले। जापान का निक्केई 225 लगभग 0.30 प्रतिशत नीचे जबकि दक्षिण कोरिया का कोस्पी एक प्रतिशत से अधिक गिरा हुआ था।