मध्य पूर्व में सुरक्षा तनाव बढ़ने और कई उड़ानों के रद्द होने के कारण उमराह के लिए गए लगभग 4,000 भारतीय यात्री सऊदी अरब के पवित्र शहरों मक्का, मदीना और जेद्दा में फंस गए हैं। इनमें मध्य प्रदेश के 300 से ज्यादा लोग शामिल बताए जा रहे हैं, जिनमें भोपाल और इंदौर से आए 120 से अधिक यात्री हैं।
हाल के दिनों में क्षेत्रीय सुरक्षा चिंताओं के कारण इंडिगो, अकासा एयर, एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस जैसी कंपनियों ने रियाद, जेद्दा, दम्माम और मदीना की कई उड़ानें निलंबित कर दीं। एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस ने रियाद तथा दम्माम की सेवाएं 7 नवंबर तक और जेद्दा की उड़ानें 31 अक्टूबर तक रद्द रखी हैं। अन्य एयरलाइंस ने भी अपनी सेवाओं को अक्टूबर अंत या नवंबर तक विस्तारित अवधि के लिए रोक दिया है।
फंसे यात्रियों को होटल, भोजन और स्थानीय आवागमन पर प्रति व्यक्ति रोजाना 4 से 5 हजार रुपये अतिरिक्त खर्च करना पड़ रहा है। सीमित बजट वाले कई परिवार आर्थिक दबाव में हैं। भोपाल के एक यात्री अनस खान परिवार के 11 सदस्यों के साथ मदीना गए थे। उनका 29 अक्टूबर का रिटर्न टिकट रद्द हो गया और वैकल्पिक उड़ान नहीं मिल पाई। ट्रैवल एजेंसी अब दूसरे देश के रास्ते वापसी का विकल्प देख रही है, जिसमें अतिरिक्त 20-22 हजार रुपये खर्च हो सकते हैं।
कांग्रेस प्रवक्ता अब्बास हफीज ने केंद्र सरकार से तत्काल विशेष व्यवस्था की मांग की है। उन्होंने कहा कि सिर्फ हेल्पलाइन नंबर जारी करने या वीजा अवधि बढ़ाने से समस्या नहीं सुलझेगी। एयरलाइंस के साथ समन्वय कर वैकल्पिक उड़ानें या विशेष विमान भेजने पर विचार किया जाना चाहिए। हफीज स्वयं उमराह पर गए थे और उड़ान रद्द होने के बाद दूसरे मार्ग से लौटे।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, रियाद स्थित भारतीय दूतावास और जेद्दा वाणिज्य दूतावास एयरलाइंस तथा टूर ऑपरेटरों के संपर्क में हैं। पिछले एक सप्ताह में करीब 3,000 फंसे उमराह यात्री उपलब्ध उड़ानों से भारत लौट चुके हैं। इसके अलावा 10,000 से अधिक नियमित यात्री भी वापस आ गए। जेद्दा और मक्का में 24 घंटे कंट्रोल रूम संचालित हैं, जहां जरूरी सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी सरकार और DGCA से बड़े विमान चलाने या विशेष उड़ानों की व्यवस्था की अपील की थी। टूर ऑपरेटरों का कहना है कि कई यात्रियों को पर्याप्त होटल-भोजन सुविधा नहीं मिली और वैकल्पिक टिकट सामान्य किराए से काफी महंगे मिल रहे थे। कुछ लोगों ने कर्ज लेकर या संपत्ति बेचकर वापसी का इंतजाम किया।