अमेरिका के लिए ‘मेड इन इंडिया’ स्मार्टफोन: ट्रंप की चेतावनियों के बावजूद एपल के बाद सैमसंग भी भारत पर केंद्रित

भारत अब वैश्विक टेक कंपनियों के लिए सिर्फ एक बड़ा बाजार नहीं रहा, बल्कि वह तेजी से मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में उभर रहा है। एपल के बाद अब सैमसंग ने भी भारत में ऐसे स्मार्टफोन बनाने की योजना शुरू कर दी है, जिन्हें सीधे अमेरिकी बाजार में बेचा जाएगा। इस बदलाव के पीछे अमेरिका की बदलती व्यापार नीतियाँ और टैरिफ को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की सख्त चेतावनियाँ मुख्य वजह बन रही हैं।

भारत बन सकता है सैमसंग का अमेरिका-एक्सपोर्ट बेस

सैमसंग अभी तक अमेरिका में अपने स्मार्टफोन वियतनाम से एक्सपोर्ट करता रहा है। लेकिन ट्रम्प प्रशासन की नीतियों के तहत यदि वियतनाम से अमेरिका को भेजे जाने वाले उत्पादों पर 20% तक का टैरिफ लागू होता है, तो इससे कंपनी की लागत में भारी इज़ाफा हो सकता है। इस संभावित चुनौती को देखते हुए सैमसंग अब भारत के ग्रेटर नोएडा स्थित अपने बड़े मैन्युफैक्चरिंग यूनिट को अमेरिकी बाजार के लिए एक्सपोर्ट हब में बदलने की तैयारी कर रहा है।

सैमसंग के ग्लोबल प्रेसिडेंट वॉन-जून चोई ने इस संबंध में जानकारी देते हुए कहा है कि कंपनी पहले से ही भारत में कुछ ऐसे स्मार्टफोन बना रही है जिन्हें अमेरिका में बेचा जा रहा है। उन्होंने साफ किया कि यदि टैरिफ को लेकर कोई बड़ा फैसला सामने आता है, तो कंपनी अपनी पूरी प्रोडक्शन श्रृंखला को भारत की ओर मोड़ने के लिए पूरी तरह तैयार है।

भारत बन चुका है एपल का अमेरिकी iPhones का उत्पादन केंद्र

दूसरी ओर, एपल ने अमेरिका में बिकने वाले आईफोन्स का उत्पादन भारत में करना काफी पहले शुरू कर दिया था। डोनाल्ड ट्रम्प की चेतावनी के बावजूद, कंपनी अब भारत को एक प्रमुख निर्माण स्थल के रूप में स्थापित कर चुकी है। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, मार्च से मई 2025 के बीच भारत से जितने भी आईफोन एक्सपोर्ट किए गए, उनमें से 97% अमेरिका भेजे गए। इनकी कुल अनुमानित कीमत 3.2 बिलियन डॉलर (लगभग 27,000 करोड़ रुपये) रही।

केवल मई 2025 में ही भारत से अमेरिका को 1 बिलियन डॉलर (करीब 8,600 करोड़ रुपये) मूल्य के आईफोन्स का निर्यात किया गया। इन आंकड़ों से यह स्पष्ट होता है कि एपल अब लगभग एक्सक्लूसिव तौर पर अमेरिका में बिकने वाले iPhone भारत में ही तैयार कर रही है। साल 2025 की शुरुआत से मई तक भारत से अमेरिका को कुल 4.4 बिलियन डॉलर (लगभग 37,000 करोड़ रुपये) के आईफोन एक्सपोर्ट किए जा चुके हैं, जो साल 2024 में हुए 3.7 बिलियन डॉलर के एक्सपोर्ट से कहीं अधिक है।

ट्रम्प की चेतावनी और भारत पर बढ़ता टेक्नोलॉजी फोकस

हालांकि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प इस बदलाव से संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने 23 मई को एक सार्वजनिक बयान में कहा था कि जो आईफोन अमेरिका में बेचे जाते हैं, उन्हें भारत या अन्य किसी देश में नहीं बल्कि अमेरिका में ही बनाया जाना चाहिए। उन्होंने यहां तक कहा कि यदि एपल ऐसा नहीं करता, तो उसे कम से कम 25% टैरिफ चुकाना होगा। ट्रम्प ने यह बात अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ’ पर भी साझा की थी।

इसके बावजूद, भारत की ओर से एपल और सैमसंग जैसी कंपनियों को आकर्षित करने के कई मजबूत कारण हैं, जो ट्रम्प की नाराजगी के बावजूद कंपनियों को भारत में निवेश करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

भारत क्यों बन रहा है ग्लोबल टेक कंपनियों का पसंदीदा मैन्युफैक्चरिंग डेस्टिनेशन?

एक तो, चीन में कोविड-19 महामारी, ट्रेड वॉर और राजनीतिक तनावों के कारण कई कंपनियों को यह महसूस हुआ कि किसी एक देश पर निर्भर रहना जोखिम भरा हो सकता है। इसीलिए सप्लाई चेन को विविध बनाना कंपनियों के लिए एक जरूरी रणनीति बन गई। भारत इस मामले में एक भरोसेमंद विकल्प बनकर उभरा है।

दूसरा बड़ा कारण है भारतीय सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ और ‘प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI)’ जैसी नीतियाँ, जिनसे कंपनियों को लोकल मैन्युफैक्चरिंग के लिए आर्थिक मदद मिलती है। एपल के प्रमुख मैन्युफैक्चरिंग पार्टनर्स जैसे फॉक्सकॉन और टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने इन योजनाओं के तहत भारत में अपने निवेश को कई गुना बढ़ा दिया है।

तीसरा, भारत का खुद का स्मार्टफोन बाजार भी दुनिया के सबसे तेज़ी से बढ़ते मार्केट्स में से एक है। लगभग 6-7% की बाजार हिस्सेदारी रखने वाली एपल अब भारत में मैन्युफैक्चरिंग करके इस हिस्सेदारी को और मजबूत करना चाहती है।

चौथा, भारत में बने आईफोन का लगभग 70% हिस्सा एक्सपोर्ट होता है। यह चीन की तुलना में भारत के कम इंपोर्ट टैरिफ का लाभ उठाने में भी मदद करता है। वर्ष 2024 में भारत से कुल 12.8 बिलियन डॉलर (लगभग 1.09 लाख करोड़ रुपये) मूल्य के iPhones का निर्यात किया गया था, जो इस ट्रेंड को दर्शाता है।

अंत में, भारत की श्रमिक शक्ति और मैन्युफैक्चरिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर में भी तेजी से सुधार हो रहा है। कर्नाटक में फॉक्सकॉन द्वारा 2.7 बिलियन डॉलर (करीब 23,000 करोड़ रुपये) का निवेश इसी दिशा में एक बड़ा कदम है।

ट्रम्प के विरोध के बावजूद भारत में भारी निवेश

डोनाल्ड ट्रम्प भले ही बार-बार यह दोहरा रहे हों कि एपल को अमेरिका में ही अपने उत्पाद बनाने चाहिए, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और है। हाल ही में फॉक्सकॉन ने तमिलनाडु में युजहान टेक्नोलॉजी (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड में 1.49 बिलियन डॉलर (करीब 12,700 करोड़ रुपये) का निवेश किया है। यह निवेश सिंगापुर यूनिट के माध्यम से किया गया है और बीते पांच दिनों में ही इसे अंतिम रूप दिया गया है।

यह सभी तथ्य इस बात की ओर इशारा करते हैं कि भारत न केवल स्मार्टफोन मैन्युफैक्चरिंग के लिए एक रणनीतिक केंद्र बनता जा रहा है, बल्कि आने वाले वर्षों में यह पूरी दुनिया के लिए एक बड़ा टेक प्रोडक्शन हब बन सकता है – चाहे अमेरिका की नीतियाँ कुछ भी कहें।