Supreme court on Udaipur Files: कन्हैयालाल हत्याकांड पर आधारित फिल्म ‘उदयपुर फाइल्स’ की रिलीज को लेकर मंगलवार, 15 जुलाई 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने कोई तत्काल आदेश देने से इनकार कर दिया है. शीर्ष अदालत ने सभी पक्षों को केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा गठित समिति के समक्ष अपनी बात रखने का निर्देश दिया है. सुप्रीम कोर्ट अब इस मामले की सुनवाई सोमवार, 21 जुलाई को करेगा.
दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र को दिया था निर्देश
इससे पहले, 10 जुलाई को दिल्ली हाई कोर्ट ने जमीयत उलेमा-ए-हिंद की याचिका पर सुनवाई करते हुए फिल्म की रिलीज पर रोक लगा दी थी. हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार को सिनेमेटोग्राफी एक्ट की धारा 6 के तहत मामले पर विचार कर फैसला लेने का निर्देश दिया था. हाई कोर्ट के इस आदेश के खिलाफ फिल्म निर्माता सुप्रीम कोर्ट पहुंचे हैं. इसके अतिरिक्त, कन्हैयालाल हत्याकांड के एक आरोपी जावेद ने भी एक याचिका दायर कर फिल्म की रिलीज रोकने की मांग की है.
सुप्रीम कोर्ट में हुई तीखी बहस
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जोयमाल्या बागची की बेंच के समक्ष फिल्म निर्माता की ओर से वरिष्ठ वकील गौरव भाटिया और वकील सैयद रिजवान अहमद ने पक्ष रखा. वहीं, जमीयत की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और मोहम्मद जावेद की ओर से मेनका गुरुस्वामी ने जोरदार जिरह की.
आर्थिक बनाम सामाजिक नुकसान की दलील
फिल्म निर्माता के वकील गौरव भाटिया ने दलील दी कि सिनेमा हॉल में फिल्म के प्रदर्शन पर अंतिम समय में रोक लगाने से निर्माताओं को काफी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है. इस पर जस्टिस सूर्यकांत ने टिप्पणी की कि दूसरा पक्ष फिल्म से सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुंचने की दलील दे रहा है. उन्होंने कहा कि आर्थिक नुकसान की भरपाई तो हो सकती है, लेकिन सामाजिक नुकसान की भरपाई मुश्किल है.
न्यायालय ने केंद्र सरकार की समिति को दिया अधिकार
सुनवाई के दौरान जजों ने स्पष्ट किया कि वे फिल्म पर अपनी ओर से कोई विचार व्यक्त नहीं कर रहे हैं, न ही हाई कोर्ट ने ऐसा किया था. हाई कोर्ट ने वैधानिक प्रावधानों के अनुसार मामला केंद्र सरकार पर छोड़ दिया. सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की समिति बुधवार, 16 जुलाई को दोपहर ढाई बजे इस मामले पर विचार करेगी. कोर्ट ने निर्देश दिया कि फिल्म निर्माता, जमीयत उलेमा-ए-हिंद और हत्या केस के आरोपी मोहम्मद जावेद के प्रतिनिधि वहां जाकर अपना पक्ष रख सकते हैं. फिल्म निर्माता ने सुप्रीम कोर्ट से समिति को 24 घंटे में फैसला लेने का निर्देश देने का अनुरोध किया, लेकिन कोर्ट ने केवल इतना कहा कि समिति जल्द से जल्द फैसला लेने का प्रयास करे.
‘फिल्म इस्लाम के खिलाफ नहीं’ और सुरक्षा की मांग
सुनवाई के दौरान जमीयत के वकील कपिल सिब्बल ने दलील दी कि फिल्म में मुसलमानों को गलत तरीके से दिखाया गया है. इस पर निर्माता के वकील रिजवान अहमद ने पलटवार करते हुए कहा कि फिल्म में इस्लाम के खिलाफ कुछ भी नहीं कहा गया है. उन्होंने तर्क दिया कि मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों को गलत दिखाना इस्लाम का विरोध नहीं कहा जा सकता.
निर्माता के वकीलों ने यह भी बताया कि फिल्म निर्माता-निर्देशक और दिवंगत कन्हैयालाल के बेटे को जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं. इस पर कोर्ट ने कहा कि सभी संबंधित लोग अपने-अपने क्षेत्र की पुलिस को सुरक्षा के लिए आवेदन दें, और पुलिस स्थिति के अनुसार आवश्यक निर्णय लेगी.