मिजोरम में 6 यूक्रेनियों की गिरफ्तारी: यूक्रेन ने भारत से रिहाई मांगी, रूस पर साजिश का इल्ज़ाम

भारत के पूर्वोत्तर राज्य मिजोरम में छह यूक्रेनी और एक अमेरिकी नागरिक की हिरासत का मामला अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर रूप ले चुका है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी द्वारा की गई इस कार्रवाई के बाद यूक्रेन ने भारत से निष्पक्ष जांच की मांग की है और अपने नागरिकों पर लगे आतंकवादी गतिविधियों के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है।

यूक्रेनी विदेश मंत्रालय के अनुसार, 13 मार्च 2026 को इन छह नागरिकों को हिरासत में लिया गया। आरोप है कि उन्होंने बिना आवश्यक विशेष अनुमति के मिजोरम में प्रवेश किया, जो एक प्रतिबंधित क्षेत्र है, और फिर भारत-म्यांमार सीमा को अवैध रूप से पार कर पड़ोसी देश में पहुंचे। भारतीय जांच एजेंसियों का दावा है कि ये व्यक्ति म्यांमार के कुछ सशस्त्र समूहों से जुड़े थे, जो संभवतः भारत विरोधी उग्रवादी तत्वों से संबंध रखते हैं। इन पर ड्रोन युद्ध और हथियार प्रशिक्षण देने के साथ-साथ यूरोप से ड्रोन की बड़ी खेप भारत के रास्ते म्यांमार भेजने का भी संदेह है।

एनआईए ने दिल्ली, लखनऊ और कोलकाता के हवाई अड्डों से इन विदेशी नागरिकों को पकड़ा था। अदालत ने उन्हें 27 मार्च 2026 तक एनआईए हिरासत में भेज दिया है।

यूक्रेन ने इस घटना पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि उसके नागरिक किसी भी आतंकी या गैरकानूनी काम में शामिल नहीं थे। यूक्रेनी दूतावास ने मीडिया रिपोर्ट्स पर चिंता जताई, जिनमें दावा किया गया कि यह कार्रवाई रूसी खुफिया एजेंसियों की सूचना पर आधारित थी। कीव का आरोप है कि रूस जानबूझकर भारत और यूक्रेन के बीच बढ़ते संबंधों में खाई पैदा करने की कोशिश कर रहा है।

यूक्रेन में भारत के राजदूत ओलेक्जेंडर पोलिशचुक ने विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात कर हिरासत में लिए गए नागरिकों तक राजनयिक पहुंच (कॉन्सुलर एक्सेस) की मांग की। यूक्रेन ने पारस्परिक कानूनी सहायता संधि के तहत पूर्ण सहयोग का वादा किया है और चेतावनी दी है कि यदि इस मामले का दुरुपयोग भारत-यूक्रेन संबंधों को नुकसान पहुंचाने के लिए किया गया, तो इसे द्विपक्षीय विश्वास पर हमला माना जाएगा।

यूक्रेन ने अगस्त 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यूक्रेन यात्रा के दौरान जारी संयुक्त बयान का हवाला देते हुए याद दिलाया कि दोनों देश आतंकवाद के खिलाफ एकजुट हैं।

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि मिजोरम जैसे कुछ क्षेत्र संरक्षित श्रेणी में आते हैं, जहां यात्रा के लिए विशेष परमिट जरूरी है। चूंकि मामला अदालत में विचाराधीन है, इसलिए जांच पूरी होने और तथ्यों के सामने आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।